Wednesday, January 15, 2020

#NewNazm JNU

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू), दिल्ली के स्टूडेंट्स के नाम
 
हम अपने वतन की ज़ीनत हैैं 
हम अहले क़लम की चाहत हैं
हम मजबूरों की हिम्मत हैं
हम मजदूरों की ताक़त हैं

बातिल से आँख लड़़ाते हैं
ज़ालिम पे बर्क़ गिराते हैं 
हाकिम भी यहाँ थर्राते हैं
कुछ ऐसी यहाँ की शोहरत है...
हम अपने वतन की ज़ीनत हैैं 

सब खेतों की, खलयनों की
कोहसारों की, मैदानों की
आवाज़ है ये दीवानों की
दामन में इस के उसअत है...
हम अपने वतन की ज़ीनत हैैं 

आईन से रिश्ता रखना है
क़ानून का सिक्का चलना है
संघर्ष इसी पे करना है
अब मुल्क की रखना इज़्ज़त है...
हम अपने वतन की ज़ीनत हैैं 

दहक़ान से अपनी यारी है
मज़लूम का पल्ला भारी है
बस आज़ादी ही प्यारी है
बस यही तो अपनी दौलत है...
हम अपने वतन की ज़ीनत हैैं 

हम दश्तो दमन पर गरजेंगे
हम गंगो जमन पर बरसेंगे
हम गुलशन गुलशन महकेंगे
ये तुझ से वादा भारत है...
हम अपने वतन की ज़ीनत हैैं 

है ख़ल्क़े खुदा का नक़्क़ारा
इंसाफ का है ये गहवारा
है हक़ का यहाँ पे नज़्ज़ारा
बातिल को यहाँ से वहशत है...
हम अपने वतन की ज़ीनत हैैं 

मज़दूर यहाँ मजबूर यहाँ
हर ज़ुल्मो जफ़ा से चूर यहाँ
हर बेबस है मसरूर यहाँ
मशहूर यहाँ की जुरअत है...
हम अपने वतन की ज़ीनत हैैं 

है हिम्मत वाला जेएनयू
है इज़्ज़त वाला जेएनयू
है जुरअत वाला जेएनयू
ये अहले जुनूँ  की तलअत है... 
हम अपने वतन की ज़ीनत हैैं 

रचनाकार: डॉक्टर अहमद मुज्तबा सिद्दीकी 
भूगोल संकाय, एएमयू
*उसअत = कुशादगी, फैलाव, बड़ा होना
*आईन = संविधान
*दहक़ान = किसान
*ख़ल्क़े = जनता
*वहशत = डर
*मसरूर = खुश
*जुरअत = हिम्मत
*अहले जुनूँ = जुनूून वाले, कर गुजरने वाले
*तलअत = उदय होना, चमकना, नया सवेरा

#शाहीन_बाग़_के_नाम #IndiaAgainstCAA_NRC_NRP

NAZM #AMU_JMI

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