ये वो टिप्पणियां हैं जो हरगिज़ नजर अंदाज नहीं की जा सकतीं।
वैसे भी अकलीमा हसन ने कल सुबह ही स्टेटस लगा लिया था,' गरीबों के अर्थशास्त्रियों की टिप्पणियों का इंतजार है'... सो पेशे खिदमत है.
Garvit Garg
Indian government cuts food subsidy by 68650 crores, from 1.84 lakh crore 2019-20 Budget Estimate to 1.08 lakh crore Revised Estimate in 2019-20 to 1.15 lakh crore in 2020-21 Budget Estimate.
मतलब ये कि सरकार ने खाद्य सब्सिडी के बजट 1.84 लाख करोड़ में से 68650 करोड़ की कटौती कर दी है.'देश के गरीबों को, भूखे मारो... को'
इकोनॉमिक सर्वे 2020 में सुझाव है कि इस देश की 20% सबसे गरीब जनता की फ़ूड सिक्योरिटी बंद कर देनी चाहिए। एक ऐसे वक़्त में जब इस देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भट्टा बैठा हुआ है, तब यह सब सुझाव आ रहे हैं। सही भी है, 'देश के गरीबों को, भूखे मारो...को।
70 exemptions in Income Tax removed which encouraged people to invest:
-No investment in mutual funds
-No new share market investment for middle class
-No new insurance policies
Result: Market adversely affected in middle of an economic slowdown.
इनकम टैक्स में सत्तर छूटें वापस ली गईं जो जनता (आप) को निवेश करने हेतु प्रोत्साहित करेंगी.
म्यूच्यूअल फंड्स में कोई निवेश नहीं।
मिडिल क्लास के लिए कोई नया शेयर मार्केट निवेश नहीं.
कोई नया इंशोरेंस पॉलिसी नहीं.
नतीजा: आर्थिक मंदी के बीच बाजार पर प्रतिकूल (नकारात्मक, Negative) असर पड़ा.
(शेयर मार्केट बुरी तरह गिरता चला गया और कई वर्षों के रिकॉर्ड टूट गए.)
Murari Tirpathi
जैसे सरकार ने गरीबों की संख्या घटा दी वैसे ही जीडीपी ग्रोथ रेट बढ़ाने का भी इंतजाम कर लिया है.
2015 में सरकार ने जीडीपी कैलकुलेशन का नया तरीका निकाला था. इससे अचानक से जीडीपी बढ़ने लगी.
कल सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.8 प्रतिशत से घटाकर 6.1 प्रतिशत कर दी.
ऐसा क्यों?
ऐसा इसलिए कि हर वित्त वर्ष की जीडीपी वृद्धि दर पिछले वर्ष के आधार पर नापी जाती है. अब अगर 2018-19 की जीडीपी ग्रोथ रेट घटा दी जाए तो 2019-20 की कम जीडीपी ग्रोथ रेट भी ज्यादा हो जाएगी.
2019-20 की जिस जीडीपी ग्रोथ के 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, वो अब सीधे 5.7 प्रतिशत हो जाएगी क्योंकि सरकार ने इससे पहले के वित्त वर्ष की जीडीपी ग्रोथ रेट घटाकर कम कर दी है.
बिल्कुल वही बात कि मेरी लाइन छोटी है, तो पहले जो बड़ी लाइन थी उसका और छोटा कर देंगे. मेरी लाइन अपने आप बड़ी दिखने लगेगी.
सरकार ने गरीबों की संख्या कम दिखाने के लिए तेंदुलकर कमेटी द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा का हवाला दिया. जबकि इसी सरकार ने नई गरीबी रेखा निर्धारित करने के लिए 2014 में रंगराजन कमेटी का गठन किया था.
तेंदुलकर कमेटी ने जो गरीबी रेखा तय की थी वो ग्रामीण इलाकों के लिए प्रतिदिन 27 रुपये और शहरी इलाकों के लिए प्रतिदिन 33 रुपये थी. रंगराजन कमेटी ने इसे बढ़ाकर क्रमश: 32 रुपये और 47 रुपये कर दिया था.
रंगराजन कमेटी के हिसाब से अगर अभी गरीबों का निर्धारण होता तो करीब 3 से चार करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे चले जाते. तो सरकार ने कहा कि हम तेंदुलकर कमेटी से ही इसकी गणना करेंगे. हमारे रामराज्य में गरीब बढ़ ही नहीं सकते हैं.
गरीबी नहीं गरीबों को ही हटाओ...
Shuja'at Qaudiri
National President of Muslim Students Organisation (#MSO)
#बजट2020 मे भविष्य के लिए कोई सटीक नीति और रोड मैप नहीं दिखाई देता है, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे अहम सेक्टर को निराशा हुई है।
कुल मिलाकर #NirmalaSitharaman ने "तेज़ हवा मे धुआं के सहारे महल" बनाने की कोशिश की है।
#Budget2020 ने ये साबित कर दिया है कि सरकार की मंशा Neo Liberalism और Neo Imperialism को बढ़ावा देकर देश को आर्थिक गुलामी की तरफ धकेलना है।
#LIC को बेचने के फैसले से सरकार पर आम जन का विश्वास उठ जाएगा।
Jeetu Ji
कृषि और सहायक गतिविधियों के साथ-साथ समूची ग्रामीण अर्थव्यवस्था की हालत खराब होने के बावजूद इस बजट में मनरेगा को मिलने वाले फंड में कटौती की गई है। जबकि ग्रामीण आय को बढ़ाने का यह सबसे अच्छा जरिया है।
चूंकि मुझे इकनॉमी की समझ नहीं है मगर फिर भी कहना चाहता हूं कि विकिपीडिया के डाटा के सहारे जब मोदीनोमिक्स की जगह थालीनोमिक्स ही चलानी थी तो इतनी चुल मचाने की क्या ज़रूरत थी!
डरो मत, तुम्हें कोई गद्दार नहीं कहेगा, तुम्हें कोई गोली नहीं मारेगा।
@MobeenJamei
Bahut gahra sankat h
ReplyDeleteJi
DeleteZabardst
ReplyDeleteResearch kar dali
घोघलिस्तान हो गया है जीडी पी का
ReplyDeleteWow...ghoghalistan
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