Tuesday, December 24, 2019

#CAAProtests भारतीय नारी आंदोलन

ये तथ्य है कि हर कामियाब शख्स या खुद कमियायबी के पीछे किसी नारी का हाथ ज़रूर होता है मगर संविधान की रक्षा में नारी का पूरा वजूद लगा हुआ है जो भारत के ज़र्रे ज़र्रे से यूं मुखातिब है...

कहिए तो आसमां को ज़मीं पर उतार लाएं 

मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए_शहरयार

यही वजह कि हाकिम ए वक़्त का लेहजा घुसपैठिए और अवैध शरणार्थी से होता हुआ "मेरी मुस्लिम बहनों..." हो गया।

कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता

एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो_दुष्यंत कुमार

हास्य व्यंग करता हुआ एक वॉट्सएप स्टेटस भी नज़र से गुज़रा..."ट्रिपल तलाक़ बिल पर मुस्लिम महिलाओं को अपनी बहन कहने वाले आज अपने बहनोई से भारतीय होने का सबूत मांग रहे हैं."

ये एक हकीकत है कि प्रधानमंत्री जी ने पिछले 6 सालों में अल्पसंख्यकों के दिल में अपनी एक अलग जगह बनाई है। यही सबब है कि उनसे उम्मीद की जाती है कि वो दिलों को तोड़ने और संविधान की रूह पर प्रहार करने वाले काले क़ानून #CAA2019 को संसद का विशेष सत्र बुला कर वापस लेंगे क्योंकि ये जनभावना के खिलाफ है। उन्हें इस काम के लिए पूरी दुनिया में सुनहरे शब्दों में याद किया जाएगा और याद किया जाता रहेगा।

दिल्ली राजस्थान (कोटा) समेत आज भी पूरे देश में शानदार विरोध प्रदर्शन हुए। छात्राएं और छात्र किसी भी कारवां की आंखें हुआ करते हैं वो भविष्य देख सकते हैं इसीलिए एक क़दम भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इन्हीं  के जज़्बे को देखते हुए भारत के हिन्दू, मुस्लिम, सीख और ईसाई सब एक हो गए हैं। भारतीय मुस्लिम महिला और पुरुष कह रहे हैं कि संविधान की रक्षा में मर जाना गवारा है...कुछ भी हो जाए...किसी भी कीमत पर उस की रूह को नहीं बदलने देना है।

बहुत से दोस्तों और बुजुर्गों से फोन पर बात हुई तो वो फलां फलां खानकाह, पीर, फ़कीर, मदरसे और मुफ्ती का नाम लेकर पूछते हैं कि वो क्या कर रहे हैं? अगर वो लीडर हैं तो उन्हें आगे आकर रहनुमाई करना चाहिए!

...तो जवाब ये है कि

कुछ तो मजबूरियां रही होंगी
यूं कोई बेवफा नहीं होता_बशीर बद्र

या...

खानकाह और मदरसा अपने अपने अमल से ये पैग़ाम दे रहे हैं कि...अब तुम्हारा खुदा ही निगहबान है।

बिल्कुल ऐसा ही नहीं है... बहुत से खानकाह और मदरसे भी इस आंदोलन में शामिल हैं और इस का हिस्सा हैं मगर आप उन्हें लीडर यानी मुखर होकर सामने आते देखना चाहते हैं तो सुनिए! वजह ये है कि जो भी पीर, फ़कीर, खानकाह और ऑर्गनाइजेशन हैं उन के पास आय से अधिक अवैध संपत्ति है...दो चंद को छोड़ दें तो किसी के पास कोई कारखाना, कंपनी या कोई बिज़नेस नहीं है। यही वजह है कि सरकार कोई भी हो उन्हें हमेशा आशीर्वाद देना ही पड़ता है वरना ईडी और इनकम टैक्स विभाग उन्हें चाए पानी का निमंत्रण भेजेंगे या स्वयं पहुंच जाएंगे..."मान न मान मैं तेरा महमान"।

मदरसों के मदारी (मुफ्ती और टीचर्स) कुछ करना भी चाहें तो नहीं कर सकते क्योंकि मदरसे किसी न किसी पीर या ऑर्गनाइजेशन के ही हैं और खामखाह साठ सत्तर हजार रूपए वाली नौकरियां, मोटे मोटे नज़राने  और आराम वाली जिंदगी सब खतरे में पड़ जाएंगे।

मगर आप हैरत से बावले हो जाएंगे कि ये सब कुछ खानकाह और मदरसे आप से हैं। आप इन से रिश्ता और श्रद्धा रखते हैं...आप ही इन्हें देते हैं और सरकारें भी इन्हें इसीलिए नवाज़ती हैं क्योंकि आप इन्हें मानते हैं जानते हैं...वो दर असल इनके माध्यम से आप को खरीदती हैं ताकि आप नागरिक न बन सको, सवाल न पूछ सको कि हमारे लाखों करोड़ टैक्स का क्या हुआ?

रोड, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि सुविधाएं क्यों उपलब्ध नहीं हैं? लोकतन्त्र का मतलब है कि हर चीज़ की मालिक जनता है यानी आप हो। सोचिए! कि आप का हक और पैसा राजनेता मार लेता है और आप का मुंह बंद रखने के लिए मुफ्ती और पीर को खरीद लेता है जो उस के लिए प्रचार, प्रसार और गली गली घूम कर गुणगान करते हैं।

आप उसे ही उम्मीद की निगाह से देखिए जिस में उम्मीद हो. कल भोपाल में शानदार "संविधान बचाओ,न्याय, शांति मार्च" का आयोजन हो रहा है। याद रखिए! आपका ये आंदोलन 1942 के आंदोलन से बड़ा आंदोलन है। आप संविधान बचाने  की लड़ाई में तन्हा नहीं हो आप के साथ पूरा देश और पूरी दुनिया खड़ी है यहां तक कि दूध पीता बच्चा भी।

जब अर्ज़-ए-ख़ुदा के काबे से

सब बुत उठवाए जाएँगे 

हम अहल-ए-सफ़ा मरदूद-ए-हरम

मसनद पे बिठाए जाएँगे 

और राज करेगी ख़ल्क़-ए-ख़ुदा 

जो मैं भी हूँ और तुम भी हो_फ़ैज़

हम लड़ेंगे... हम जीतेंगे...जय हिन्द...जय संविधान

@MobeenJamei



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