दहली दिल्ली मगर #Delhi
'तिहाड़ीचरस' मदिरा के दम पर दिल्ली 2020 का चुनाव शाहीनबाग़ बनाम भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बनाने की कोशिश की गयी. मीडिया का पेट कमज़ोरों और पिछड़ों के लहू और लाश से भरता है...इस बार पेट भरा तो ज़रूर मगर ज़ायक़ा कुछ अच्छा नहीं रहा.
आज के #DelhiElectionResults ने साबित कर दिया कि दिल्ली चुनाव शहीनबाग बनाम बीजेपी और हिन्दू बनाम मुस्लिम न था और न ही होना चाहिए.
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| ईवीएम का बटन कुछ ज़्यादा ही ज़ोर से दब गया... |
राम मंदिर के बाद बीजेपी के पास कुछ है ही नहीं इसीलिए वो #CAA और #NRC और #NPR लायी ताकि 2050 तक हिन्दू-मुस्लिम जारी रहे और सत्ता अपने पास रखी जा सके...उम्मीद है कि अब सुप्रीम कोर्ट में भी जस्टिस #Loya का भूत नहीं आत्मा बसेरा करेगी.
नागपुर के नाग को...अब तो यारों त्याग दो
आम आदमी पार्टी (आप) की राजनीति राइट, लेफ्ट या सेन्ट्रल में तो कहीं नज़र नहीं आती. भारत में पगडण्डी पर दौड़ कर राजनीति की पनघट तक पहुँचना आसान है मगर पानी भर कर गगरी ला पाना बहुत मुश्किल है इसी मुश्किल में पड़कर आप (केजीरवाल) से ग़लतियां ज़रूर हुई हैं लेकिन इन्हीं ग़लतियों से एक अच्छी बात ये निकल कर आयी कि दिल्ली 2020 का चुनाव गवर्नेंस के नाम रहा. दिल्ली की जनता ने गवर्नेंस को वोट किया न कि ऑडियोलॉजी को. ये अच्छी बात है और इसी अच्छी बात को पूरे भारत में फैलने और फैलाने की ज़रूरत है ताकि हमारी राज्य सरकारें कुछ काम भी करें. सिर्फ हु हल्ला, नारेबाजी और हिन्दू मुस्लिम से काम नहीं चलेगा.
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मुख्यमठी बााबा बिष्ट को चाहिए कि वो देसी घी में पनीर की वेज बिरयानी बनवाकर खाएं और गंगा स्नान करें क्योंकि अब उनके ज़हर ने दवा का काम करना शुरू कर दिया है.
मठ में मठाधीश की अध्यक्ष्ता में मठ्ठे से भरे जाम का दौर चले. चुनाव प्रचार में बाबा का ट्रैक रिकॉर्ड बहुत ख़राब होता जा रहा है. ये जहाँ जहाँ गये बीजेपी वहां वहां झंड हो गयी.
ये भारत के केंद्र प्रशासित राज्य दिल्ली का पहला चुनाव था जिसमे प्रधानमंत्री, गृहयुद्धमंत्री समेत दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के लगभग 250 सांसद और आठ मुख्यमंत्रियों ने चुनाव प्रचार पार्टीहित में किया और रिजल्ट देशहित में गया.
इस कद्र गंदी और घटिया राजनीति अब तक नहीं की गई थी...सो ये भी हो चली। किसी का जन्म किसी मुल्क में उसकी मर्ज़ी से नहीं होता है।
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिंदी हैं हम वतन हैं हिन्दोस्ताँ हमारा
सारे जहां से अच्छा..._इक़बाल
सीएम केजरीवाल से उम्मीद की जाती है कि किसी भाषा के प्रति या किसी भी इलाक़े में भेदभाव हरगिज़ देखने को नहीं मिलेगा दुर्भाग्य से जो पिछले पांच सालों में नज़र आया. बधाई हो दिल्ली..बधाई हो केजरीवाल.
@MobeenJamei

बात तो सही है भाई
ReplyDeleteShukria
DeleteDehli se desh badalne ka sanket hai
ReplyDeleteBilkul
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