"हम बोलेंगे"
लाज़िम है कि हम भी बोलेंगे
जब हाकिम ज़ालिम बन जाए
वहशत का बादल तन जाए
दहशत में पूरा दिन जाए
नामूस ए निस्वां छिन जाए
तब बोलना हम पे लाज़िम है
"हम बोलेंगे"
लाज़िम है कि हम भी बोलेंगे
जब धर्म के पत्ते उछलने लगे
जम्हूरी निज़ाम बदलने लगे
बू-जहल के वारिस फिरने लगे
और इलमी मराकिज़ जलने लगें
तब बोलना हम पे लाज़िम है
"हम बोलेंगे"
लाज़िम है कि हम भी बोलेंगे
इस खाक ए वतन को लहू अपना
सद शौक़ दिया है किस ने सदा ?
सौ जां से है इस पे कौन फिदा
मशकूक हमारी क्यों है वफा!
अब बोलना हम पे लाज़िम है
"हम बोलेंगे"
लाज़िम है कि हम भी बोलेंगे
ये ज़ुल्मो सितम होगा कब तक!
देंगे वो हमें धोका कब तक!
कुढ़ कुढ़ के बता! जीना कब तक!
लेंगे न हम हक अपना कब तक!
अब बोलना हम पे लाज़िम है
"हम बोलेंगे"
लाज़िम है कि हम भी बोलेंगे
ये वक़्त नहीं है डरने का
ये वक़्त है डटकर रहने का
कुछ खौफ नहीं कट मरने का
हां! वक़्त है जमकर लड़ने का
अब बोलना हम पे लाज़िम है
"हम बोलेंगे"
लाज़िम है कि हम भी बोलेंगे
इक रोज़ इस रात को ढलना है
दीप अमनो वफा का जलना है
इंसाफ में सबको तुलना है
आज़ादी तो इक दिन मिलना है
फिर चुप साधे क्यों रहना है
अब बोलना हम पे लाज़िम है
"हम बोलेंगे"
लाज़िम है कि हम भी बोलेंगे...
✍️New Nazm written by अफ़रोज़ आलम चिरैयाकोटी Sir
नामूस ए निस्वां छिन जाए
ReplyDeleteतब बोलना हम पे लाज़िम है
Wah