संविधान की रक्षा हर भारतीय का कर्तव्य है। ये वो पवित्र किताब है जो हम से, हमारे लिए और हमारी ही किताब है। ये सदियों की इंसानी मेहनत व मशक्कत का नतीजा है। सच्ची बात ये है कि हमारे लिए असली भारत माता यही है जो हम से कुछ नहीं मांगती बल्कि हम जो मांगते है वो तो देती ही है... साथ ही बड़े लाड दुलार से़ वो भी दे देती है जो हम नहीं मांग पाते या जिनके बारे में हम नहीं सोच पाते क्योंकि हम इतने जगरुक और शिक्षित नहीं हैं.
आज (23Dec 2019) के दिन संविधान के शहीदों और जख्मियों कि रुहों को बड़ा सुकून मिला होगा जब उन्हें याद करते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने ये कहा कि ये ये आंदोलन "भारत छोड़ो आन्दोलन" से बड़ा आंदोलन है जबकि अब तक हम यही कहते आ रहे थे कि ये कि ये जे पी आंदोलन से बड़ा आंदोलन है.
भारत की बेटियों और सपूतों का खून ज़िंदाबाद है....जो संविधान की राह का आब ए हयात बन गया. ये आंदोलन सफलता के उस शिखर तक जायेगा जिस की अब तक कल्पना भी नहीं की गई होगी।अर्थव्यवस्था देखते देखते क्या से क्या हो गई. जनता का सवाल है...
सीने में जलन आंखो में तूफान सा क्यों है...?
इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है...?
...मगर साहब का जवाब सिर्फ "मन की बात" है मगर बात से कहीं पेट भरता है क्या? खाने पीने की चीजें किस हद तक मंहगी हो गई हैं। प्याज़, सब्ज़ी,दूध और अब रेलवे का किराया भी बढ़ने वाला है। रेलवे का किराया तो बहुत पहले बढ़ गया होता मगर झारखंड का इलेक्शन था...लिहाज़ा कुछ दिनों के लिए रोक लिया गया था।
याद कीजिए! जब साहब नए नए केंद्र में आए थे तो उन्होंने ने बिहार में कहा था कि मैं खुश नसीब हूं...देखिए मेरे प्रधान सेवक बनते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल की कीमत घट गई है।
ख्याल रहे कि डॉक्टर मनमोहन सिंह के वक़्त पेट्रोल 67 डॉलर पर बैरल था मगर मई 2014 के बाद 30 से 36 डॉलर मगर उस वक़्त पेट्रोल की कीमत कम नहीं की गई बल्कि जनता को खूब लूटा गया और जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में पेट्रोल की कीमत बढ़ने लगी और तेल कम्पनियों ने कहा कि उनका घाटा हो रहा है तो उसी खुश नसीब के चतुर वित्तमंत्री ने कानून बना दिया कि कम्पनियां खुद ही हर दिन कीमत तैं करें यही वजह है कि हर दिन डीज़ल और पेट्रोल की नई कीमत जारी होती है जबकि मनमोहन सिंह ने 67 डॉलर पर बैरल के वक़्त कम्पनियों से कहा कि आप को हम सबसिडी देंगे आप कीमत मत बढ़ाओ मगर प्रधान सेवक ने मलाई खा कर मट्ठा भी आप को दुगने दाम में बेच दिया... ये हैं असली गुजराती।
राजनीति और बिज़नेस में गुजरात के दो राजनेता और दो ही उद्योगपति सबसे ज़्यादा फायदे में हैं बाकी सब घाटे में हैं....खुद ही जांच परख कर लीजिए इस से भी कहीं ज़्यादा सच्चाई आपको हाथ लगेगी।
साथियों!संविधान बचाने की लड़ाई में आप तन्हा नहीं हो....आप के साथ पूरा देश और देश समेत पूरी दुनिया के स्टूडेंट खड़े हैं।
हम किसी को नागरिकता दिए जाने के खिलाफ नहीं है बल्कि इस बात के खिलाफ हैं कि CAA2019 संविधान की अवधारणा,प्रस्तावना, आर्टिकल 14 और बुनियादी ढांचे के खिलाफ है। नागरिकता देने के लिए धर्म को बुनियाद बनाना संविधान की रूह पर हमला है। केंद्र सरकार से बड़ी अथॉरटी भारत में कोई और है क्या? जब नहीं है तो वो जिसे नागरिकता देना चाहती है उसे दे मगर धर्म का तड़का न लगाए। बहुत हो चुका हिंदू मुस्लिम....अब और नहीं...हरगिज़ नहीं।
साफ है कि इन्हें हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा चाहिए कयोंकि अब राम मंदिर का रास्ता साफ हो गया है. राम मंदिर का रास्ता साफ होने से इन्हें सब से ज़्यादा नुकसान हो रहा है. इन्हे लगता है कि हिन्दू मसुलिम आपस में दुश्मन हैं जब्कि ये भी जानते हैं कि हम भारत के लोग हैं. हमारी सभ्यता हर दौर के लिए प्रकाश का उत्सव है...
अगर वो खुल्द हमें मुफ्त में ही मिल जाती
तो ज़िन्दगी में कभी इमतेहा नहीं होता
मदद के वास्ते यारों खुदा को याद करो
खुदा से बढ़ के कोई महरबां नहीं होता_ज़ुल्फ़िक़ार हसन असर
@MobeenJamei
قابل تعریف مضمون ہے اور وقت کے مطابق آپ نے سچائیاں لکھی ہیں
ReplyDeleteیہ لڑائی درحقیقت تحفظ آئین ہند کی ہے
غلام غوث جامعی بارہ بنکوی
Thank you Sir...
DeleteAbsolutely...it's for only our holy constitution.
well done dear... keep it.
ReplyDeleteWah
Thanks.
Delete🌹
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