जीवन लम्बा होने के बजाये महान होना चाहिए_बाबा साहेब
अगर संविधान की संरचना में मुख्य किरदार निभाने वाले डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर "बाबा साहेब" प्रथम केंद्रीय क़ानून मंत्री न बने होते तो जो आज हो रहा है शायद वो बहुत पहले हो चुका होता और हम यहाँ "सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा" न गा रहे होते.
यह ऐतिहासिक तथ्य है कि जो आज की राजनीति है उस के राजनीतिज्ञ आज़ादी के वक़्त कांग्रेस में ज़्यादा थे. हिन्दू महासभा खुलकर ज़रूर मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़रूर थी मगर उस ने यह गुंजाईश भी रखी थी कि मुस्लिम लीग के साथ मिल कर सरकार बना सके और उस ने बनाया भी और बना कर चलाया भी मगर कांग्रेस की ढाल में वह लोग जिनकी फितरत दोग़ले चरित्र की थी उन्होंने कभी कोई गुंजाईश की राह नहीं अपनायी.(मौलाना अबुलकलाम आज़ाद की "India wins freedom" ज़रूर पढ़ें)
गाँधी जी ने थोड़ी सख्ती भरी सलाह दी थी कि बाबा साहेब को Constituent Assembly में लाओ उनकी नज़र दुनिया
के तमाम संविधान पर है.... उनके जैसा कोई नहीं... वरना उस वक़्त की कांग्रेस इस क़दर
संकीर्ण थी कि वो बाबा साहेब को "अछूत" समझ कर बिलकुल बर्दाश्त करने को तैयार
न थी. यह भी सत्य है कि कांग्रेस ने बाबा साहेब को हरवाने कि पूरी कोशिश की मगर वो
फिर भी मुस्लिम बाहुल्य छेत्र से चुन कर आये.
आज दलितों (ST/SC) की अनुमानित आबादी 33 फीसद से ज़्यादा है. अगर क़ायदे से सियासी
पंडित बिश्लेषण दें तो छह से सात राज्य में दलितों का मुख्यमंत्री होना चाहिए और उनका प्रधानमंत्री परमानेंट. मगर ज़रा सोचिये कि कैसे उल्लू बना कर रखा हुआ है. 14 फीसद से
ज़ेयाद की जनसंखया यहां मुस्लिम की है मगर वो अपनी राजनितिक हैसियत ही खो बैठे हैं.
अगर दलित मुस्लिम एक हो कर अहिंसा के रास्ते अपने अधिकारों के लिए लड़ें तो जाहिल, गुंडे और काले अंग्रेज़ों
की हमेशा के लिए छुट्टी हो सकती है.
दलित मुस्लिम का गठबंधन भारत की 47 फीसद आबादी से अधिक होती है और 33 फीसद वोट पाकर 300 सीटों से ज़्यादा वाली बहुमत की सरकार बन जाती है जबकि
सारे लोग वोट नहीं करते महज़ 60 से 65 फीसद
लोग ही वोट करते हैं.
CAA 2019
सीधा सीधा संविधान की प्रस्तावना और आर्टिकल 14 के खिलाफ है. ये संविधान की रूह पर
हमला है. बाबा साहेब ने कहा था कि जब तक संविधान मौजूद है समझो मैं तुम्हारे बीच ज़िंदा
हूँ. काले अंग्रेज़ों की फाशिस्ट सरकार ने बाबा साहेब के वजूद पर हमला किया है. हम इसे हरगिज़ बर्दाश्त नहीं
करेंगे!!!
जय भीम....जय मीम....जय संविधान
@MobeenJamei
Baba saheb sarahniye h AJ ham San mil Kar rah rahe h
ReplyDeleteBilkul...jai samvidhan
ReplyDeleteWah
ReplyDeleteBhim...Bhim
دلت مسلم اتحاد اگر ہوجائے تو یقینا بھارت کا نقشہ بہت حد تک تبدیل ہو سکتا ہے لیکن ایسا ہو نہیں سکتا ہے کیوں کہ اس اہم کا بیڑا اٹھانے کے لیے کوئی تیار ہی نہیں ہوگا
ReplyDeleteاور یہ بھی واضح رہے کہ ہم ہندوستانی مسلمانوں میں بھی ذات, برادری اور اونچ کانیچ کا تصور حددرجہ موجودہےجب تک یہ بیماری ختم نہیں ہوگی تب تک کامیابی اور فلاح فقط تصور ہوگا اور بس