हिन्दुस्तान दुनिया के बड़े बाजारों में से एक है इसी लिए दुनिया हिन्दुस्तान को अपनी पसंद से ज़्यादा ज़रूरत की नज़र से देखती है। ये एक ऐसा अनूठा बाज़ार है कि जिसे दुनिया का आठवां अजूबा घोषित किया जा सकता है क्योंकि यहां कुछ भी बेचिए...चंद (सौ या हज़ार) खरीदार आप को ज़रूर मिल जाएंगे।
इस बाज़ार का चैंपियन राजनेता के बाद मीडिया है। आप सोच भी नहीं सकते कि ये क्या क्या बेचते और खरीदते हैं।
पिछले कई बरसों से पाकिस्तान का नाम ले ले कर यहां के अल्पसंख्यकों के खिलाफ माहौल पैदा किया गया फिर नफरत का गोरख धंधा शुरू हुआ जो आज अपने चरम पर है। सिर्फ पैकेट बदला गया और माल वहीं पुराना "नफरत" ही बेचा गया। हकीकत ये है कि पाकिस्तान किसी मुकाबले में हिन्दुस्तान के सामने नहीं टिकता।
असम संस्कृति और भाषा को बचाने के नाम पर शुरू होने वाले आन्दोलन के नतीजे में एनआरसी वजूद में आया।
20 दिसंबर 2019 को dailyhunt पे छपने वाले असीम और संजय वर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक़ तमाम उम्र असम से घुसपैठियों को निकालने में लगा देने वाले वरिष्ठ पत्रकार मृणाल तालुकदार ने अपनी किताब 'पोस्ट कोलोनियल आसाम' के विमोचन के मौके पर कहा कि हमने एक पागलपन में ज़िन्दगी गुज़ार दी। इस प्रोग्राम में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई भी मौजूद थे। उन्हीं के हाथों किताब का विमोचन हुआ। उनकी अगली पुस्तक 'NRC का खेल' कुछ ही दिनों में आने वाली है।
श्री मृणाल एनआरसी पर केंद्र की सलाहकार समिति के सदस्य हैं और वो आल असम स्टूडेंट यूनियन 'आसू' से भी जुड़े रहे हैं। दो बार वो असम की सत्ता का सुख भी भोग चुके हैं। बे हिसाब खर्च करने के बाद अब वो निराश हैं और कह रहे हैं कि हमें एनआरसी से पैदा होने वाले मानवीय त्रासदी का अंदाज़ा नहीं था।
भारत के बच्चों को ज़ुल्मो सितम से खामोश रहने पर मजबूर किया गया तो माएं सड़कों पर निकल आईं और मां कभी हारती नहीं।
CAA2019+NRC+NRP= Divide and Rule की क्रोनोलॉजी हर भारतीय समझ चुका है। अब कुछ नहीं हो सकता। लोकतंत्र में इलेक्शन और सिलेक्शन सब कुछ जनता के हिसाब से ही होता है और जनता CAA2019+NRC+NRP= Divide and Rule के खिलाफ है।
मोदी की कसम
अगर मोदी जी या अमित शाह जी कुछ महीनों के लिए मुस्लिम वेशभूषा अपनाएं और समाज में रह कर देखें...जिस हनक का प्रदर्शन वो करते रहते हैं अगर करते रहे तो समाज (हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई) उनके जीते जी उनकी समाधी के निर्माण कार्य में सरगर्म हो जाएगा... सच्ची...मोदी की कसम।
आप जो करना चाहते हैं उसके लिए आप को दो ढाई सौ साल पहले पैदा होना चाहिए था। वैसे बीजेपी विपक्ष का किरदार सबसे अच्छा निभाती है। हर किसी को याद है जब मनमोहन सिंह की सरकार में प्याज़ 60 से 80 रुपए प्रति किलो हुई थी तो बीजेपी ने जो आन्दोलन किया था वो अपनी मिसाल आप है। ये बात अब भारतीय जनता शिद्दत से महसूस करती है।
अब आप ही देखिए...प्याज़, दूध, सब्ज़ी, खाने पीने की चीजें, नौकरी आदि की हालत कितनी खराब है मगर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बीएसपी, आरजेडी, एनसीपी और आप समेत आज की पूरी विपक्ष किस कद्र खामोश है। इनकी तरफ से कोई हरकत नहीं हो रही है। मीडिया बेचारा क्या करे 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' का राग दरबारी अलाप रहा है।
@MobeenJamei
🌹🌹🌹
ReplyDelete👍👍👍
शुक्रिया
DeleteInformative article
ReplyDeleteThanks Sir
DeleteGood
ReplyDeleteشکرا
DeleteBahot khub
ReplyDeleteThank you Bhai
ReplyDeleteShukria
ReplyDeleteआप पढ़ते रहें...ताकि हम लिख सकें और लिखते रहें...शुक्रिया आप सभी लोगों का। खुश रहें।
ReplyDeleteKeep on mubeen bhai. You are doing very well. I feel very delighted reading your interesting articles specially Hindi ones. New version of Ravish kumar in future. You should also uploaded videos in YouTube with the same content. It will be easily popular and can make a number of subscribers. Please do it if possible. You can do it.
ReplyDeleteThanks...
DeleteYour suggestions...as well as possible.
Wah Dear...Keep it.
ReplyDeleteplz #wakeupIndia
شکریہ
DeleteDear Mobeen
ReplyDeleteKeep it...well done bro
Thank you...
DeleteWah....hahaha
ReplyDeleteKeya kasam hai Meri Jan...