Wednesday, December 18, 2019

कोमल है कमज़ोर नहीं...

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है_फ़ैज़

हिन्दुस्तान की बेटियों का लहू राएगां नहीं जायेगा! हम संविधान बचाने की जंग लड़ रहे हैं. ये कोई हिन्दू मुस्लिम की रोज़ रोज़ वाली न्यूज़ चनैलों के माध्यम से प्रयोजित लड़ाई नहीं है. भारतीय संविधान के लिए 'हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई...आपस में हैं भाई भाई'. सब मिल कर लड़ रहे हैं.

आप को बेहद ख़ुशी होगी....indianexpress की खबर है की पेशे से वकील....असम के पूर्व मुख्यमंत्री 32 साल बाद फिर मैदान-ए- वकालत में हैं. वो सुप्रीम कोर्ट में CAA2019 केस में पी चिदंबरम को असिस्ट करेंगे.
NDA में शामिल अकाली दाल और बीजेपी को खुल कर या पीछे के दरवाज़े से सपोर्ट करने वाली पार्टियां बीजू जनता दल (BJD) बहुजन समाज पार्टी (BSP) और शिव सेना भी संविधान बचाने की लड़ाई में आप के साथ हैं.राष्ट्रीय और अंतर राष्ट्रीय सतह पर स्टूडेंट और उन के संघठन भी आप के शाना-ब- शाना खड़े हैं.
खबर है कि... आज दिल्ली में वकीलों ने भी CAA  के हवाले से विरोध प्रदर्शन किया है. 
जनता भी कह रही है कि बीजेपी की निय्यत साफ नहीं है. अर्थव्यस्था के मोर्चे पर मोदी हुकूमत बिलकुल नाकाम है. एक तरफ तमाम कम्पनियां घाटे में जा रही हैं और बंद होने के कगार पर हैं. जीडीपी 4.5 (आधा) हो गयी है और दूसरी तरफ गुजरात के दो उद्द्योगपति मुसलसल फायदे में हैं. बड़ी बड़ी सरकारी कम्पनियां मोदी हुकूमत उन्हें टके के भाव दे रही है. 
राजनीति में दो गुजराती और बिज़नस में भी दो ही गुजरती समूचे भारत को उल्लू बना रहे हैं.

आप को शायद मालूम हो कि दिल्ली में प्याज़ के सटॉक हैं फिर भी प्याज़ 150 रूपये किलो बिक रही है. आर्टिकल 370  हटाने की वजह से हज़ारों करोड़ का नुकसान पहले ही हो चूका है... अभी भी इनका नाटक ख़त्म नहीं हुआ है बल्कि एक और नौटंकी शुरू हो गयी है.

साफ है कि इन्हें हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा चाहिए कयोंकि अब राम मंदिर का रास्ता साफ हो गया है. राम मंदिर का रास्ता साफ होने से इन्हें सब से ज़्यादा नुकसान हो रहा है. इन्हे लगता है कि हिन्दू मसुलिम आपस में दुश्मन हैं जब्कि ये भी जानते हैं कि हम भारत के लोग हैं. हमारी सभ्यता हर दौर के लिए प्रकाश का उत्सव है....  
ये मिलें ये जागीरें किस का ख़ून पीती हैं
बैरकों में ये फ़ौजें किस के बल पे जीती हैं
किस की मेहनतों का फल दाश्ताएँ खाती हैं
झोंपड़ों से रोने की क्यूँ सदाएँ आती हैं
जब शबाब पर आ कर
खेत लहलहाता है किस के नैन रोते हैं
कौन मुस्कुराता है
काश तुम कभी समझो... काश तुम कभी समझो
काश तुम कभी जानो सवा सौ करोड़ इंसानो!_हबीब जालिब
... बद नियति और झूठ की हद होती है. मौजूदा गुनाहों के देवता न्याय और इंसानियत वाली दुनिया की सबसे खूबसूरत किताब बाबा साहेब द्वारा निर्मित भारतीय संविधान की रूह पर हमला कर रहे हैं. कल राष्ट्रिय स्तर पर #CAAProtests होने वाला है हम भारत के लोगों का शिरकत करना ज़रूरी है वरना संविधान की अर्थी उठ जाएगी और हमें तेरहीं का भी भोजन नहीं मिलेगा. 


मगर याद रखिये! अहिंसा ही सब से बड़ा हथियार है. हमारी लड़ाई किसी पुलिस कर्मी से नहीं... वो भी आप की तरह मजबूर ग़रीब है. वो अपनी नौकरी आपकी सुरक्षा के लिए कर रहा है. पुलिस वाले आप के दोस्त हैं...बिलकुल हिंसा मत कीजिये. सौ बात की एक बात गांठ बांध लीजिये कि अहिंसा रामबाण है. अहिंसा से तो गोरे अँगरेज़ भाग गए जो बहुत पढ़े लिखे विद्दवान थे... तो इन जाहिल, गुंडे, और गुनाहों के देवता.... काले अंग्रेज़ो की क्या औक़ात है!

@MobeenJamei


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