सनक हमेशा अंधी होती होती है वो कभी भी यतार्थ को संजीदगी से नहीं लेती. लोकतंत्र जब तक है तब तक धूल तो झोंकी जा सकती है मगर अँधा नहीं बनाया जा सकता.
बिज़नस अखबारात उठा कर देखिए...लगता है कि पूरे देश में मातम चल रहा है। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने बहुत सी बातें कही हैं जिन में सबसे अहम बात ये है कि फिलहाल महामंदी चल रही है और सरकारी आंकड़ों पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि उनमें बहुत ज़्यादा हेरा फेरी हुई है और मौजूदा जीडीपी जो बताई जा रही है वो तीन फीसद से भी कम है उनके अनुसार आंकड़ों को दुरुस्त करना भी बहुत बड़ा चैलेंज है जबकि पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन प्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री और चंद ब्यूरोक्रेट को ज़िम्मेदार मानते हैं। कल का बिज़नेस स्टैंडर्ड पढ़िए... मंदी की वजह से 2.8 लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है।
मैं अपने मुहल्ले में देख रहा हूं कि हर घर के दरवाज़े पर "To Let" का बोर्ड लग गया है। मतलब ये है कि अब यहां काम नहीं है लिहाज़ा तमाम किरायेदार अपना अपना बोरिया बिस्तर लेकर घर चले गए हैं।
CAA2019+NRC+NRP= Divide and Rule एक ज़िंदा हक़ीक़त है जो तरह तरह का रूप धार रही है मगर हर रूप बहरूपिया बन कर अपना काम कर जाये...ये ज़रूरी नहीं है. दुनिया अब खूबसूरत हो कर ही रहेगी कयोंकि अब महिलाएं इसे खूबसूरत बनाने की जद्दो जहद जी जान से कर रही हैं. कौन जनता था की छात्राएं, महिलाएं, छात्र और आम जान मानस इस क़दर जाग उठेगा. ये ऐतिहासिक तथ्य है की जब आम जान मानस जग जाये... वो भी अपनी आँख यानि स्टूडेंट के जगाने पर तो कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ है जो उसे जग जीतने से रोक सके.
#CAAProtests का आकार बढ़ता ही जा रहा एक तरफ आम जनता जिनका कोई लीडर नहीं है, मैदान में है दूसरी तरफ बीजेपी-आरएसएस. ये लड़ाई लोकल से ग्लोबल यानि 'विश्व प्रदर्शन' में तब्दील हो चुकी है. शिकागो, जापान, मुंबई, दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए हैं. दिल्ली के शाहीन बाग़ में तो बीते दस बारह दिनों से 24 घंटे का महिलाओं का धरना प्रदर्शन जारी है. संविधान बचाने की लड़ाई बहुत लम्बी चलेगी इस लड़ाई को सिर्फ महिलाएं ही जीत सकती हैं जो अपने अपने सीनों में मां का जिगर रखती हैं. मां के हिस्से में सिर्फ फतह है उसे कभी शिकस्त नहीं होती.
गुर्गों से सावधान...!
वक़्त और हालात के पेश-ए-नज़र बहुत से लोग चोला बदलने लगे हैं जिनमे सरकारी मौलवी भी शामिल हैं. कल ही उमैर इल्यासी का बयान आया है कि वो इस मसले पर प्रधानमंत्री से मुलाक़ात करेंगे. प्रदर्शन छात्राओं और महिलाओं का और मिलें मिलाएं वो जो आरएसएस सरसंघ चालक के साथ स्टेज शेयर करते हैं! हरगिज़ नहीं. बहुत से गुर्गे बौखलाए हुए दौड़ भाग कर रहे हैं. ये आंदोलन को कमज़ोर करेंगे. ये और इन जैसे तमाम लोगों से सावधान रहें. ये बहुत चालाक होते हैं सिर्फ उचकने आते हैं।
थक हार कर उस वक़्त तक दम न लें जब तक की इस काले क़ानून को वापस नहीं लिया जाता.
यहां के हिन्दुओं को समझना चाहिए कि उन्हें कितना बेवकूफ बनाया जा रहा है। अर्थ्यवस्था की हालत पतली है। हिन्दू हिन्दू कहकर हिंदुत्व की सुरक्षा की जाती है। अगर सनातन धर्म की सुरक्षा मकसद होता तो समाज से भेदभाव ख़त्म किया जाता तमिलनाडु में तीन हज़ार दलित मुस्लिम होने की चेतावनी दे रहे हैं। क्यों दे रहे हैं पता है? क्योंकि ऊंची जात के लोगों ने अपना मुहल्ला अलग करने के लिए बे बुनियाद दीवार खड़ी कर दी जो गिर गई और 17 दलित मर गए. जब दलितों ने इंसाफ कि गुहार लगाई तो उन्हीं के खिलाफ कारवाई कर दी गई। इसी तरह आदिवासियों के लिए हिन्दू हिन्दू की रट लगाने वाले कुछ नहीं करते। ईसाई मिशनरी स्कूल और अस्पताल बनाकर उन्हें देती है और वो ईसाई बन जाते हैं तो इनकी हाय तौबा शुरू हो जाती है...आखिर ये उनके लिए काम क्यों नहीं करते? उन्हें सुविधाएं क्यों नहीं देते? तो जवाब ये है कि उन्हें सनातन से कोई लेना देना नहीं...इन्हें हिंदुत्व का प्रभुत्व चाहिए ताकि 20 फीसद ऊंची जातियों का वर्चस्व 80 फीसद की आबादी वाली निचली जातियों पर क़ायम रहे...जो सदियों सदियों से चला आ रहा है।
अब एक ही रास्ता है कि संविधान की रक्षा की जाए जो सबकी रक्षा करता है।
जय हिन्द...जय संविधान...!!
@MobeeJamei
Bilkul sahi sanak bhagao Desh bachao
ReplyDeleteBilkul koi do Raye nahin....sanak andhi hoti hai.
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