Tuesday, April 14, 2020

System hunts the real India #InTheNameOfMuslim


वास्तविक भारत सिस्टम और साज़िशों का शिकार


कहा जाता है कि असली भारत देखना है तो यहाँ के गॉंवों का भ्रमण ज़रूरी है. पूरी दुनिया कोविड-19 के क़हर का शिकार है. इस महामारी से अब तक 300 से ज़्यादा भारतीय समेत पूरी दुनिया में एक लाख से अधिक लोगो की मौत हो चुकी है. इसे फैलने से रोकने के लिए ही लॉकडाउन जैसा सख्त फैसला किया गया है, जिसे आज 03 मई तक बढ़ा दिया गया है.बड़ी मुश्किलों और मुसीबतों का सामना करते हुए लोग कोरोना से लड़ रहे हैं मगर कुछ गांव देहात में अकारण ही कोरोना के नाम पर विशेष वर्ग के कुछ खास लोगों को जानबूझ कर निशाना बनाते हुए परेशान किया जा रहा है.

11 अप्रैल 2020 की शाम को अचानक एम्बुलेंस, पुलिस और डॉक्टर की गाड़ियों का क़ाफ़िला बहराइच के मीरपुर गावं, मौलाना, सय्यद ज़मीर अल्वी (बदला हुआ नाम) के घर पहुँचता है. बिना किसी पुख्ता सुबूत और तथ्य के उनसे कहा जाता है कि वो अस्पताल चलें, उन्हें सूचना मिली है कि वो दिल्ली स्थित तब्लीग़ी जमात, मरकज़ के प्रोग्राम में शरीक हो कर लौटे हैं.


ज़मीर ने कहा की यह सूचना ग़लत और निराधार है. उन्होंने कहा की पिछले छह माह से तो मैं घर पर ही हूँ. गत 23 फरवरी 2020 को मेरी शादी हुई है.इस बीच मैं 11 दिसंबर 2019 को पासपोर्ट के लिए लखनऊ ज़रूर गया था.आप के पास क्या सुबूत है कि मैं दिल्ली में आयोजित हुए तब्लीग़ी जमात, मरकज़ के प्रोग्राम से लौटा हूँ.


आश्चर्यजनक है कि एक महिला स्वास्थ्यकर्मी कहती हैं कि पहले इनकी स्क्रीनिंग (टेंपेरेचर) कर लेते हैं, अगर ज़रूरत होगी तो अस्पताल ले चलेंगे, मगर क़ैसरगंज थाने के दरोगा उदयचंद तिवारी ने कहा कि नहीं, इन्हें अस्पताल ले चलिए! इतना कहते ही वो, तुरंत चलने के लिए ज़मीर पर दबाव बनाने लगे. वो इस तरह पेश आ रहे थे...मानो 302 के केस की छानबीन हो रही हो और उन्होंने आरोपी को धर लिया हो जबकि मीरपुर के पूर्व प्रधान के बेटे ने ज़मानत लेते हुए कहा कि ये पिछले छह माह से घर पर ही हैं मगर दरोगा जी ने एक न सुनी.

ज़मीर जब चलने के लिए राज़ी हो गए और कहा कि पूरे कपड़े पहन लें फिर चलते हैं तो दरोगा ने दबाव बनाने की कोशिश की कि नहीं ऐसे ही चलिए. ज़मीर  ने जब सख्त लहजे में कहा की इतनी जल्दी है तो आप लोग चलिए! मैं अपनी कार से आता हूँ, तो दरोगा जी ने कहा कि ठीक है...आप तैयार हो कर आइये. इतनी देर में गॉंव के लोग बड़ी संख्या में ज़मीर के घर इकठ्ठा हो चुके होते हैं...ख़ाली काग़ज़ पर ही, पुलिस रिफ़ार्म हेतु ख़ूब जोर दिया जाता है जबकि सच्चाई ये है कि पुलिस का तौर तरीक़ा इतना गन्दा और सांप्रदायिकतापूर्ण है कि आज भी गांव में किसी के घर पुलिस का आना ठीक नहीं माना जाता.


ज़मीर जब अस्पताल पहुंचे तो उन्हें कहा गया कि वो एम्बुलेंस से  न उतरें. दरोगा अंदर जाते हैं और झटपट डॉक्टर एन के सिंह, प्रभारी अस्पताल, क़ैसरगंज और डॉक्टर हुकुम सिंह, समुदायिक सवास्थ्य केंद्र, कैसरगंज से रेफ़र के काग़ज़ात लाते हैं जिस पर "तब्लीग़ी जमात केस" लिखा होता है. ग़ौरतलब है कि यहाँ के डॉक्टरों ने प्राइमरी स्क्रीनिंग भी नहीं की और तथाकतिथ मरीज़ को बिना देखे ही निःसंकोच जिला अस्पताल, बहराइच रेफर कर दिया.


जिला अस्पताल में ज़मीर की डॉक्टर से बहस हो गयी कयोंकि डॉक्टर का ज़ोर बस इसी बात पर था कि उन्हें  जल्द से जल्द क्वारंटाइन किया जाये. डॉक्टर साहब का रवैया सख्त था और वो कुछ भी मानने को तैयार नहीं थे. ज़मीर ने कहा कि  मीडिया वालों को बुलाइये मैं बताना चाहता हूँ कि मेरा जमात या दिल्ली से कोई नाता नहीं और मैं बिलकुल स्वस्थ हूँ फिर भी मुझे क्वारंटाइन किया जा रहा है. थोड़ी देर बाद सी एम ओ बहराइच आ गए. ज़मीर ने उन्हें पूरी कहानी बताई कि क़ैसरगंज अस्पताल ने बिना किसी प्रारंभिक स्क्रीनिंग के ही मुझे यहाँ रेफर कर दिया है और "तबलीग़ी जमात केस" लिख दिया है जबकि मेरा तब्लीग़ी जमात से कोई लेना देना नहीं है. सी एम ओ ने पूछा की स्क्रीनिंग हुई? बताया गया कि अभी नहीं. उन्होंने स्क्रीनिंग करवाई तो टेम्प्रेचर बिलकुल नॉर्मल था और ज़मीर बिलकुल स्वस्थ पाए गए.उन्होंने डॉक्टर से कहा कि वह काग़ज़ात पर दस्तख़त करें और इन्हें छोड़ दिया जाये.

ज़मीर ने दावा किया कि कुछ असमाजिक तत्व और पुलिस ने मिलकर उन्हें जान बूझ कर परेशान किया.

#InTheNameOfMuslim इस पूरे घटनाक्रम से कुछ महत्वपूर्ण और बड़े सवाल जन्म लेते हैं कि एक ऐसे वक़्त में जबकि भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को हेल्थ इमरजेंसी का सामना करना पड़ रहा है हमारे यहाँ PPE, दवा, डॉक्टर और अमले की सख्त ज़रूरत है. ऐसे में इतनी बेदर्दी से सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग क्यों? आखिर पुलिस और मेडिकल टीम ने ज़मीर  के घर पर ही उनका टेम्प्रेचर क्यों नहीं मापा? किसके कहने पर डॉक्टर एन के सिंह, प्रभारी अस्पताल, क़ैसरगंज ने बिना देखे ही, दरोगा को रेफर काग़ज़ात थमा दिये? आखिर! दरोगा ने इतनी ज़िद क्यों पकड़ रखी थी? 21वीं  शताब्दी में भी, किसी सम्मानीय सज्जन के घर, पुलिसिया बारात ले जाना और गंदे तरीके से बातें करने की फालतू एनर्जी आयी कहाँ से?  इस पूरी कवायद में जो सरकारी संसाधन और अमले का दुरुपयोग हुआ उसकी भरपाई कौन करेगा? सरकारी संपत्ति का मालिक अस्ल में जनता है क्योंकि ये जनता के ही डायरेक्ट और इन-डायरेक्ट टैक्स से जुटाया जाता है. पब्लिक सर्वेंट को पब्लिक सर्वेंट ही रहना चाहिए... क्योंकि सर्वेंट वही अच्छा, जो हमेशा मालिक का वफादार रहे. क्या ज़मीर को एक मुस्लिम होने की वजह से अकारण परेशान किया गया?


Dargah, Shoaib-ul-Aaulia
ज़मीर  सूफी समाज के एक सम्मानीय धर्मगुरु (मौलाना) हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी और बहराइच प्रशासन से मांग की है कि उचित जाँच करवाई जाये और थाना क़ैसरगंज के दरोगा उदयचंद तिवारी के खिलाफ सख्त करवाई की जाये.


@MobeenJamei
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