Monday, December 30, 2019

मोदी की कसम

हिन्दुस्तान दुनिया के बड़े बाजारों में से एक है इसी लिए दुनिया हिन्दुस्तान को अपनी पसंद से ज़्यादा ज़रूरत की नज़र से देखती है। ये एक ऐसा अनूठा बाज़ार है कि जिसे दुनिया का आठवां अजूबा घोषित किया जा सकता है क्योंकि यहां कुछ भी बेचिए...चंद (सौ या हज़ार) खरीदार आप को ज़रूर मिल जाएंगे।

इस बाज़ार का चैंपियन राजनेता के बाद मीडिया है। आप सोच भी नहीं सकते कि ये क्या क्या बेचते और खरीदते हैं।

पिछले कई बरसों से पाकिस्तान का नाम ले ले कर यहां के अल्पसंख्यकों के खिलाफ माहौल पैदा किया गया फिर नफरत का गोरख धंधा शुरू हुआ जो आज अपने चरम पर है। सिर्फ पैकेट बदला गया और माल वहीं पुराना "नफरत" ही बेचा गया। हकीकत ये है कि पाकिस्तान किसी मुकाबले में हिन्दुस्तान के सामने नहीं टिकता। 

असम संस्कृति और भाषा को बचाने के नाम पर शुरू होने वाले आन्दोलन के नतीजे में एनआरसी वजूद में आया।
20 दिसंबर 2019 को dailyhunt पे  छपने वाले असीम और संजय वर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक़ तमाम उम्र असम से घुसपैठियों को निकालने में लगा देने वाले वरिष्ठ पत्रकार मृणाल तालुकदार ने अपनी किताब 'पोस्ट कोलोनियल आसाम' के विमोचन के मौके पर कहा कि हमने एक पागलपन में ज़िन्दगी गुज़ार दी। इस प्रोग्राम में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई भी मौजूद थे। उन्हीं के हाथों किताब का विमोचन हुआ। उनकी अगली पुस्तक 'NRC का खेल' कुछ ही दिनों में आने वाली है।
श्री मृणाल एनआरसी पर केंद्र की सलाहकार समिति के सदस्य हैं और वो आल असम स्टूडेंट यूनियन 'आसू'  से भी जुड़े रहे हैं। दो बार वो असम की सत्ता का सुख भी भोग चुके हैं। बे हिसाब खर्च करने के बाद अब वो निराश हैं और कह रहे हैं कि हमें एनआरसी से पैदा होने वाले मानवीय त्रासदी का अंदाज़ा नहीं था। 

ये एक प्राकृतिक मनुष्यता है जिसकी आखिर आखिर में  संवेदनशीलता भी महान हो जाती है मगर  इस धरती पर कुछ ऐसे भी प्राणी हैं जिन्हें इस बात में ज़्यादा मज़ा आता है कि डाल काट कर गिरा दो क्योंकि वो फर्जी दुश्मन के सिर पर गिरेगी इससे कोई मतलब नहीं कि जिस डाल को वो काट रहे  हैं उसी पर खुद भी खड़े हैं।

भारत के बच्चों को ज़ुल्मो सितम से खामोश रहने पर मजबूर किया गया तो माएं सड़कों पर निकल आईं और मां कभी हारती नहीं। 

CAA2019+NRC+NRP= Divide and Rule की क्रोनोलॉजी हर भारतीय समझ चुका है। अब कुछ नहीं हो सकता। लोकतंत्र में इलेक्शन और सिलेक्शन सब कुछ जनता के हिसाब से ही होता है और जनता CAA2019+NRC+NRP= Divide and Rule के खिलाफ है।

मोदी की कसम
अगर मोदी जी या अमित शाह जी कुछ महीनों के लिए  मुस्लिम वेशभूषा अपनाएं और समाज में रह कर देखें...जिस हनक का प्रदर्शन वो करते रहते हैं अगर करते रहे तो समाज (हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई) उनके जीते जी उनकी समाधी के निर्माण कार्य में सरगर्म हो जाएगा... सच्ची...मोदी की कसम। 

आप जो करना चाहते हैं उसके लिए आप को दो ढाई सौ साल पहले पैदा होना चाहिए था। वैसे बीजेपी विपक्ष का किरदार सबसे अच्छा निभाती है। हर किसी को याद है जब मनमोहन सिंह की सरकार में प्याज़ 60 से 80 रुपए प्रति किलो हुई थी तो बीजेपी ने जो आन्दोलन किया था वो अपनी मिसाल आप है। ये बात अब भारतीय जनता शिद्दत से महसूस करती है।

अब आप ही देखिए...प्याज़, दूध, सब्ज़ी, खाने पीने की चीजें, नौकरी आदि की हालत कितनी खराब है मगर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बीएसपी, आरजेडी, एनसीपी और आप समेत आज की पूरी विपक्ष किस कद्र खामोश है। इनकी तरफ से कोई हरकत नहीं हो रही है। मीडिया बेचारा क्या करे 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' का राग दरबारी अलाप रहा है।

@MobeenJamei

Saturday, December 28, 2019

#CAAProtests विश्व प्रदर्शन

सनक हमेशा अंधी होती होती है वो कभी भी यतार्थ को संजीदगी से नहीं लेती. लोकतंत्र जब तक है तब तक धूल तो झोंकी जा सकती है मगर अँधा नहीं बनाया जा सकता. 

बिज़नस अखबारात उठा कर देखिए...लगता है कि पूरे देश में मातम चल रहा है। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने बहुत सी बातें कही हैं जिन में सबसे अहम बात ये है कि फिलहाल महामंदी चल रही है और सरकारी आंकड़ों पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि उनमें बहुत ज़्यादा हेरा फेरी हुई है और मौजूदा जीडीपी जो बताई जा रही है वो तीन फीसद से भी कम है उनके अनुसार आंकड़ों को दुरुस्त करना भी बहुत बड़ा चैलेंज है जबकि पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन प्रत्यक्ष रूप से प्रधानमंत्री और चंद ब्यूरोक्रेट को ज़िम्मेदार मानते हैं। कल का बिज़नेस स्टैंडर्ड पढ़िए... मंदी की वजह से 2.8 लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है।
मैं अपने मुहल्ले में देख रहा हूं कि हर घर के दरवाज़े पर "To Let" का बोर्ड लग गया है। मतलब ये है कि अब यहां काम नहीं है लिहाज़ा तमाम किरायेदार अपना अपना बोरिया बिस्तर लेकर घर चले गए हैं। 

CAA2019+NRC+NRP= Divide and Rule एक ज़िंदा हक़ीक़त है जो तरह तरह का रूप धार रही है मगर हर रूप बहरूपिया बन कर अपना काम कर जाये...ये ज़रूरी नहीं है. दुनिया अब खूबसूरत हो कर ही रहेगी कयोंकि अब महिलाएं इसे खूबसूरत बनाने की जद्दो जहद जी जान से कर रही हैं. कौन जनता था की छात्राएं, महिलाएं, छात्र और आम जान मानस इस क़दर जाग उठेगा. ये ऐतिहासिक तथ्य है की जब आम जान मानस जग जाये... वो भी अपनी आँख यानि स्टूडेंट के जगाने पर तो कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ है जो उसे जग जीतने से रोक सके. 
#CAAProtests का आकार बढ़ता ही जा रहा एक तरफ आम जनता जिनका कोई लीडर नहीं है, मैदान में है दूसरी तरफ बीजेपी-आरएसएस. ये लड़ाई लोकल से ग्लोबल यानि 'विश्व प्रदर्शन' में तब्दील हो चुकी है. शिकागो, जापान, मुंबई, दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए हैं. दिल्ली के शाहीन बाग़ में तो बीते दस बारह दिनों से 24 घंटे का महिलाओं का धरना प्रदर्शन जारी है. संविधान बचाने की लड़ाई बहुत लम्बी चलेगी इस लड़ाई को सिर्फ महिलाएं ही जीत सकती हैं जो अपने अपने सीनों में मां का जिगर रखती हैं. मां के हिस्से में सिर्फ फतह है उसे कभी शिकस्त नहीं होती. 

गुर्गों से सावधान...!
वक़्त और हालात के पेश-ए-नज़र बहुत से लोग चोला बदलने लगे हैं जिनमे सरकारी मौलवी भी शामिल हैं. कल ही उमैर इल्यासी का बयान आया है कि वो इस मसले पर प्रधानमंत्री से मुलाक़ात करेंगे. प्रदर्शन छात्राओं और महिलाओं का और मिलें मिलाएं वो जो आरएसएस सरसंघ चालक के साथ स्टेज शेयर करते हैं! हरगिज़ नहीं. बहुत से गुर्गे बौखलाए हुए दौड़ भाग कर रहे हैं. ये आंदोलन को कमज़ोर करेंगे. ये और इन जैसे तमाम लोगों से सावधान रहें. ये बहुत चालाक होते हैं सिर्फ उचकने आते हैं।

थक हार कर उस वक़्त तक दम न लें जब तक की इस काले क़ानून को वापस नहीं लिया जाता.
यहां के हिन्दुओं को समझना चाहिए कि उन्हें कितना बेवकूफ बनाया जा रहा है। अर्थ्यवस्था की हालत पतली है। हिन्दू हिन्दू कहकर हिंदुत्व की सुरक्षा की जाती है। अगर सनातन धर्म की सुरक्षा मकसद होता तो समाज से भेदभाव ख़त्म किया जाता तमिलनाडु में तीन हज़ार दलित मुस्लिम होने की चेतावनी दे रहे हैं। क्यों दे रहे हैं पता है? क्योंकि ऊंची जात के लोगों ने अपना मुहल्ला अलग करने के लिए बे बुनियाद दीवार खड़ी कर दी जो गिर गई और 17 दलित मर गए. जब दलितों ने इंसाफ कि गुहार लगाई तो उन्हीं के खिलाफ कारवाई कर दी गई। इसी तरह आदिवासियों के लिए हिन्दू हिन्दू की रट लगाने वाले कुछ नहीं करते। ईसाई मिशनरी स्कूल और अस्पताल बनाकर उन्हें देती है और वो ईसाई बन जाते हैं तो इनकी हाय तौबा शुरू हो जाती है...आखिर ये उनके लिए काम क्यों नहीं करते? उन्हें सुविधाएं क्यों नहीं देते? तो जवाब ये है कि उन्हें सनातन से कोई लेना देना नहीं...इन्हें हिंदुत्व का प्रभुत्व चाहिए ताकि 20 फीसद ऊंची जातियों का वर्चस्व 80 फीसद की आबादी वाली निचली जातियों पर क़ायम रहे...जो सदियों सदियों से चला आ रहा है। 
अब एक ही रास्ता है कि संविधान की रक्षा की जाए जो सबकी रक्षा करता है। 
जय हिन्द...जय संविधान...!!
@MobeeJamei

Thursday, December 26, 2019

CAA2019+NRC+NRP= Divide and Rule

छात्राओं, छात्र और आम जनता लोकतंत्र की घुसपैठिया फासीवाद सरकार के काले क़ानून यानी CAA2019+NRC+NRP= Divide and Rule के विरोध में सड़कों पर हैं. ये उसी असली हिंदुस्तान की तस्वीर है जो महावीर के उसूलों अहिंसा, अपरिग्रह, अनेकांतवा और 'जियो और जीने दो' के मूल विचारों के रंग में रंगी हुई है। जनता किसी भी क़ीमत पर सौ दो सौ साल पहले वाली ज़िन्दगी भूल जाइये...एक क़दम भी पीछे जाने को तैयार नहीं. हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सब एक साथ लामबंद हो कर बाबा साहेब के संविधान को बचाने के लिए ज़िन्दगी की आखिरी साँस और खून का आखिरी क़तरा तक निछावर करने को तत्पर हैं. 

ये भारतीय इतिहास का सब से बड़ा आंदोलन है. महिलएं जो गृहणी हैं उनका जज़्बा क़ाबिल-ए-दीद है. ये संविधान के लिए कठिन वक़्त है इसी लिए इसे कोई बहन, कोई बीवी, कोई भांजी, कोई भतीजी और कोई मां ही बचा सकती है.

बीजेपी और उसके आक़ा एक बहुत बड़ी जनता को बेवक़ूफ़ समझते हैं जो कम पढ़ी लिखी है या पढ़ी लिखी तो है मगर पढ़ी लिखी जाहिल है. उसे अपने बारे में सोचने ही नहीं देते. जब भी वो कुछ कहने की कोशिश करती है तो उसे लॉलीपॉप दिया जाता है कि वो देखो! हम ने तुम्हारे फ़र्ज़ी दुश्मन की ऐसी की तैसी कर दी... फलस्वरूप वो फिर से सूझ बूझ छोड़ कर उसी बने बनाये जाल में फँस जाती है मगर कब तक... कभी तो वो पूछेगी की हमारा लाखों करोड़ का टैक्स क्या हुआ? रोटी, कपडा और माकन कहाँ है? 

बताइये! आपके साथ UAE में कुछ ग़लत हुआ तो क्या आप यहाँ के लोगों से बदला लेंगे? सिर्फ इसलिए कि UAE में मुस्लिम ज़्यादा हैं जबकि हकीक़त ये है की यहाँ का मुस्लिम भारतीय है और उसकी भाषा, पहनावा, खान पान और रहन सहन वहां से अलग है. सिवाए इस बात के कि वो मुस्लिम है और UAE एक मुस्लिम बाहुल्य देश है कोई तुक नहीं है।

हिंदुस्तान के लिए मुसलानों ने क़ुर्बानिया दी हैं और संघर्ष किया है और 'जब तक है जां' करते रहेंगे।

सभी का ख़ून है शामिल यहां की मिट्टी में

किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है_राहत इंदौरी

देखिये! हम किसी को नागरिकता देने के खिलाफ नहीं नहीं हैं मगर धर्म के आधार पर किसी भी क़ानून को नहीं मानते. CAA2019,NRC और NPR
एक धोका है कयोंकि जब एक हिन्दू और एक मुस्लिम अपनी अपनी नागरिकता साबित करने में विफल हो जायेंगे तो CAA के सबब हिन्दू को नागरिकता मिल जाएगी मगर मुसलमान को डिटेंशन कैंप में रखा जायेगा और उस के तमाम अधिकार छीन लिए जायेंगे...वो अपने ही घर में बेघर हो जायेगा...! 

जितना लोगों को बांटा जाएगा लोग उतना ही एक होते जाएंगे।अरे साहब! हमने आप पर थोड़ा भरोसा क्या किया आप ने तो अपना असली रंग ही दिखा दिया।

कितनी ही जानें ले लो...थोड़ी देर के लिए सन्नाटा हो जायेगा मगर सन्नाटा ही तो बड़े तूफान का पेशखेमा है। 

ये आन्दोलन भारतीय नारी आन्दोलन है। घर घर फैल चुका है। इसे दबा पाना किसी के बस में नहीं...खुद फरेबी का जिगर रखने वाले...चाहे कितनी ही लोमड़ी की चाल चल लें।

याद रखिए! मैं एक इंसान हूँ...मुझसे ये नहीं पूछा गया था कि मैं किस देश और किस घर में पैदा होना चाहता हूँ. अगर मैं यहाँ हूँ तो वैसे ही हूँ जैसे आप हैं.

@MobeenJamei

Wednesday, December 25, 2019

राज्यराम

हर वर्ष होने वाले रामलीला में राम का जो किरदार पेश किया जाता है उस से हर कोई, चाहे वो किसी भी धर्म का अनुयायी हो, प्यार करता है और मर्यादा परुषोत्तम श्री राम उस के लिए रहत का दूसरा नाम बन जाते हैं. निसंकोच जिस राम की लीला में पूरा हिंदुस्तान लीन हो जाता है वो सनातन के राम हैं...सब के राम हैं.

हाल ही में पूरे देश में 'CAA2019+NRC=?' के खिलाफ छात्राओं, छात्र और पूरी भारतीय जनता इस उद्देश्य के साथ कि हम इसे किसी भी कीमत पर नहीं मानेंगे...अपना शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन दर्ज करवा रहे हैं...जहां जहां गैर बीजेपी सरकारें हैं वहां कोई हिंसा या उपद्रव नहीं हुआ लेकिन जहां बीजेपी की सरकारें हैं वहां खूब हिंसा हुई...जिस तरह से पुलिस का इस्तेमाल 'पार्टी बॉय' की तरह किया गया है वो राम के नाम पर एक ध्ब्बा है। 

कितने ही घर उजड़ गए. बूढ़े मां बाप बे सहारा हो गए...देख कर कलेजा मुंह को आता है।
जिस तरह से वीडियो सामने आए हैं उनसे साफ है कि यूपी में सबसे ज़्यादा हिंसा हुई है। रात में सीसीटीवी कैमरे तोड़ना घरों के अंदर घुस कर सामान तोड़ना और तबाही मचाना किस के आदेश पर हुआ?

पुलिसकर्मी बड़ी मुश्किल से हाई स्कूल और इंटर पास होते हैं और कई तो फर्जी मार्कशीट पर नौकरी कर रहे हैं. इन का बर्ताव हैवानों जैसा ही रहेगा मगर डीजीपी, आईपीएस डीएम, एसडीएम और एसपी तो बहुत पढ़े लिखे हैं वो हमेशा ऐसे क्यों प्रदर्शित होते हैं कि देश की अंतरात्मा कहती है कि ये झूठ बोल रहे हैं। बलिया के डीएम साहब मिड डे मील के नाम पर नमक से रोटी खाते हुए बच्चों का वीडियो एक अखबार के पत्रकार द्वारा बनाए जाने पर कहते हैं कि वो प्रिंट के पत्रकार हैं...वो वीडियो कैसे बना सकते हैं? यूपीएससी क्लियर करने वालों का यही स्तर रहेगा तो फिर किसी और से क्या ही उम्मीद की जाए! क्या ये कहना ग़लत है कि आप सिलेबस रट कर किसी तरह क्वालीफाई कर गए हैं। मुझे पता है जब तक एग्जाम क्लियर नहीं हुआ रहता है तब तक गरीबों, देश और दुनिया के लिए अच्छे अच्छे काम करने की लच्छेदार बातें करते रहते हैं और जब एग्जाम क्लियर हो जाता है तो सब भूल कर घटिया  से घटिया नेता के आगे पीछे दुम हिलाते नजर आते हैं। क्या हो जाता है कोई नहीं जानता! अरे दम है तो वो करो जो करने के लिए अपने आपको इतना रगड़ा है!

उत्तर प्रदेश के सीएम श्री आदित्य नाथ योगी जी वही हैं जिनका रिकॉर्डेड बयान है कि मुस्लिम महिलाओं को क़ब्रों से निकाल कर रपे करो। मैं ने माननीय मुख्यमंत्री एवं योगी जी को संस्कृत के श्लोक पढ़ते कभी न तो देखा है और न ही सुना है मगर जब भी टीवी पर इन्हें बोलते हुए सुनता हूं तो लगता है कि छोटा 'स' और बड़ा 'श' दोनों एक हैं। 

जब से इन्हें यूपी की बागडोर मिली है तब से पूरे प्रदेश में जात पात के भेदभाव का बाज़ार गर्म है। सरकारी दफ्तरों में अपने अपने वर्चस्व के लिए ब्रह्मण और छत्रिय अलग लड़ रहे हैं तो ऐसे में बेचारे ओबीसी, एससी और एसटी को पूछता कौन है! आप गूगल कीजिए15 दिसंबर 2019 से अब तक फतहपुर और पीलीभीत समेत पूरे प्रदेश में कितनी बालिग और नाबालिग लड़कियों को रेप करने के बाद जिंदा जला दिया गया।
हिंदुत्व का राज्यराम यही है। इस में राज पहले राम बाद में ..."राज्यराम"

देश की हालत क्या है? अर्थ्यवस्था कहां जा रही है कुछ नहीं! बस एजेंडा चलते रहना चाहिए। राम मंदिर के निर्माण से सब से ज़्यादा नुकसान बीजेपी को हो रहा है। अब इनके पास कोई मुद्दा ही नहीं। जब साग, सब्ज़ी, आलू, प्याज़, दूध, डीजल, पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और नौकरियों की बात आती है तो जवाब में सिवाए "मन की बात" के कुछ भी नहीं है।

सनातन  के राम का रामराज्य समावेशी और सहिष्णु है...!!

ज़ुल्म से किसी को दबाया और मिटाया नहीं जा सकता...हो सकता है कि कुछ दिनों के लिए खामोशी छा जाए मगर...गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी और अम्बेडकर  जैसी हस्तियां इस धरती पर जन्म लेती रहेंगी। 

कुछ लोग मुझे समझा रहे हैं कि तुम ने CAA को समझा नहीं है। हमें घुसपैठियों को बाहर निकालना है जो हमारा हक मार रहे हैं...तो सीधी सी बात है...जवाब दीजिए...पिछले पचास वर्षों से RAW, IB, ANI, CBI और अलग अलग राज्यों की सिक्योरटी एजेंसियां CID, LIU और पुलिस...सब मिलकर क्या अब तक घास छील रहे थे...! या इन में सब के सब गधे ही भर लिए गए हैं? आर्मी सहित कितनी लेयर है सिक्योरटी की...!! क्या ये पहचान नहीं कर सकते? अर्थव्यवस्था क्या होगी? ज़रा सोचिए! 1600 करोड़ सिर्फ 2.3 करोड़ की आबादी (असम) पर सरकारी यानी टैक्स का पैसा खर्च हुआ... कागजात बनवाने और दौड़ने धुपने में जनता का अपना अलग बेहिसाब पैसा लग गया तो एक सौ पैंतीस करोड़ की आबादी पर कितना खर्च होगा? करेप्शन कितना होगा? 

3000 दलितों ने इस्लाम धर्म अपनाने की घोषणा की

https://hindi.siasat.com/news/3000-dalits-set-accept-islam-after-nadur-wall-collapse-1164587/amp/

इसी तरह आप इलज़ाम लगाते हैं कि स्कूल और अस्पताल बनाकर...लालच देकर आदिवासियों को ईसाई बनाया जा रहा है। आप सुविधा क्यों नहीं देते और भेदभाव खत्म क्यों नहीं करते? वो इस लिए कि तुम्हे सनातन से कोई मतलब नहीं है।  तुम्हें हिंदुत्व चाहिए ताकि वर्चस्व बना रहे!...अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता! आप ने कभी सनातन धर्म की सुरक्षा की ही नहीं बल्कि धर्म का नाम लेकर अपने वर्चस्व और झूठे आन बान शान की सुरक्षा की है। आप दुनिया ही को नहीं अपने आप को भी धोका दे रहे हैं।

क्या अवैध शरणार्थियों से निपटने और नागरिकता देने के लिए हमारे पास पहले से मौजूद पर्याप्त क़ानून नहीं है? क्या पहले किसी को नागरिकता नहीं दी गई?? अगर हां, तो फिर इतना तांडव मचाने की क्या ज़रूरत है। स्वास्थ्य, शिक्षा और नौकरी की हालत पहले से ही खराब है। जिसे आप नागरिक बनाएंगे उसे क्या देंगे? केंद्र सरकार से बड़ी भारत में कोई अथॉरिटी है क्या? अगर नहीं तो जिसे देना है दो मगर संविधान को बख्श दो। बड़ी मुश्किल से देश कुछ आगे बढ़ पाया है मगर अब ऐसा लगता है कि सब कुछ चौपट हो जाएगा...इसी लिए आप सभी लोगों से हाथ जोड़कर अपील है कि कुछ सोच समझ से काम लीजिए... संविधान बचा लीजिए...देश बचा लीजिए। CAA दरअसल संविधान बदलने की देरीना कोशिशों का खुल्लम खुल्ला प्रदर्शन है।

फौज तुमने लगाई है किस काम पर

बरबरियत ने जिस की बिगाड़े हैं घर

लाठियां जिसकी चलतीं खवातीन पर

अब सितम के ये मौके मिलेंगे नहीं 

हम रुकेंगे नहीं, हम झुकेंगे नहीं

तुम डराते रहो हम डरेंगे नहीं...!!!

जय हिन्द...जय संविधान

@MobeenJamei

Tuesday, December 24, 2019

#CAAProtests भारतीय नारी आंदोलन

ये तथ्य है कि हर कामियाब शख्स या खुद कमियायबी के पीछे किसी नारी का हाथ ज़रूर होता है मगर संविधान की रक्षा में नारी का पूरा वजूद लगा हुआ है जो भारत के ज़र्रे ज़र्रे से यूं मुखातिब है...

कहिए तो आसमां को ज़मीं पर उतार लाएं 

मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए_शहरयार

यही वजह कि हाकिम ए वक़्त का लेहजा घुसपैठिए और अवैध शरणार्थी से होता हुआ "मेरी मुस्लिम बहनों..." हो गया।

कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता

एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो_दुष्यंत कुमार

हास्य व्यंग करता हुआ एक वॉट्सएप स्टेटस भी नज़र से गुज़रा..."ट्रिपल तलाक़ बिल पर मुस्लिम महिलाओं को अपनी बहन कहने वाले आज अपने बहनोई से भारतीय होने का सबूत मांग रहे हैं."

ये एक हकीकत है कि प्रधानमंत्री जी ने पिछले 6 सालों में अल्पसंख्यकों के दिल में अपनी एक अलग जगह बनाई है। यही सबब है कि उनसे उम्मीद की जाती है कि वो दिलों को तोड़ने और संविधान की रूह पर प्रहार करने वाले काले क़ानून #CAA2019 को संसद का विशेष सत्र बुला कर वापस लेंगे क्योंकि ये जनभावना के खिलाफ है। उन्हें इस काम के लिए पूरी दुनिया में सुनहरे शब्दों में याद किया जाएगा और याद किया जाता रहेगा।

दिल्ली राजस्थान (कोटा) समेत आज भी पूरे देश में शानदार विरोध प्रदर्शन हुए। छात्राएं और छात्र किसी भी कारवां की आंखें हुआ करते हैं वो भविष्य देख सकते हैं इसीलिए एक क़दम भी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इन्हीं  के जज़्बे को देखते हुए भारत के हिन्दू, मुस्लिम, सीख और ईसाई सब एक हो गए हैं। भारतीय मुस्लिम महिला और पुरुष कह रहे हैं कि संविधान की रक्षा में मर जाना गवारा है...कुछ भी हो जाए...किसी भी कीमत पर उस की रूह को नहीं बदलने देना है।

बहुत से दोस्तों और बुजुर्गों से फोन पर बात हुई तो वो फलां फलां खानकाह, पीर, फ़कीर, मदरसे और मुफ्ती का नाम लेकर पूछते हैं कि वो क्या कर रहे हैं? अगर वो लीडर हैं तो उन्हें आगे आकर रहनुमाई करना चाहिए!

...तो जवाब ये है कि

कुछ तो मजबूरियां रही होंगी
यूं कोई बेवफा नहीं होता_बशीर बद्र

या...

खानकाह और मदरसा अपने अपने अमल से ये पैग़ाम दे रहे हैं कि...अब तुम्हारा खुदा ही निगहबान है।

बिल्कुल ऐसा ही नहीं है... बहुत से खानकाह और मदरसे भी इस आंदोलन में शामिल हैं और इस का हिस्सा हैं मगर आप उन्हें लीडर यानी मुखर होकर सामने आते देखना चाहते हैं तो सुनिए! वजह ये है कि जो भी पीर, फ़कीर, खानकाह और ऑर्गनाइजेशन हैं उन के पास आय से अधिक अवैध संपत्ति है...दो चंद को छोड़ दें तो किसी के पास कोई कारखाना, कंपनी या कोई बिज़नेस नहीं है। यही वजह है कि सरकार कोई भी हो उन्हें हमेशा आशीर्वाद देना ही पड़ता है वरना ईडी और इनकम टैक्स विभाग उन्हें चाए पानी का निमंत्रण भेजेंगे या स्वयं पहुंच जाएंगे..."मान न मान मैं तेरा महमान"।

मदरसों के मदारी (मुफ्ती और टीचर्स) कुछ करना भी चाहें तो नहीं कर सकते क्योंकि मदरसे किसी न किसी पीर या ऑर्गनाइजेशन के ही हैं और खामखाह साठ सत्तर हजार रूपए वाली नौकरियां, मोटे मोटे नज़राने  और आराम वाली जिंदगी सब खतरे में पड़ जाएंगे।

मगर आप हैरत से बावले हो जाएंगे कि ये सब कुछ खानकाह और मदरसे आप से हैं। आप इन से रिश्ता और श्रद्धा रखते हैं...आप ही इन्हें देते हैं और सरकारें भी इन्हें इसीलिए नवाज़ती हैं क्योंकि आप इन्हें मानते हैं जानते हैं...वो दर असल इनके माध्यम से आप को खरीदती हैं ताकि आप नागरिक न बन सको, सवाल न पूछ सको कि हमारे लाखों करोड़ टैक्स का क्या हुआ?

रोड, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि सुविधाएं क्यों उपलब्ध नहीं हैं? लोकतन्त्र का मतलब है कि हर चीज़ की मालिक जनता है यानी आप हो। सोचिए! कि आप का हक और पैसा राजनेता मार लेता है और आप का मुंह बंद रखने के लिए मुफ्ती और पीर को खरीद लेता है जो उस के लिए प्रचार, प्रसार और गली गली घूम कर गुणगान करते हैं।

आप उसे ही उम्मीद की निगाह से देखिए जिस में उम्मीद हो. कल भोपाल में शानदार "संविधान बचाओ,न्याय, शांति मार्च" का आयोजन हो रहा है। याद रखिए! आपका ये आंदोलन 1942 के आंदोलन से बड़ा आंदोलन है। आप संविधान बचाने  की लड़ाई में तन्हा नहीं हो आप के साथ पूरा देश और पूरी दुनिया खड़ी है यहां तक कि दूध पीता बच्चा भी।

जब अर्ज़-ए-ख़ुदा के काबे से

सब बुत उठवाए जाएँगे 

हम अहल-ए-सफ़ा मरदूद-ए-हरम

मसनद पे बिठाए जाएँगे 

और राज करेगी ख़ल्क़-ए-ख़ुदा 

जो मैं भी हूँ और तुम भी हो_फ़ैज़

हम लड़ेंगे... हम जीतेंगे...जय हिन्द...जय संविधान

@MobeenJamei



Monday, December 23, 2019

हरगिज़ नहीं...

संविधान की रक्षा हर भारतीय का कर्तव्य है। ये वो पवित्र किताब है जो हम से, हमारे लिए और हमारी ही किताब है। ये सदियों की इंसानी मेहनत व मशक्कत का नतीजा है। सच्ची बात ये है कि हमारे लिए असली भारत माता यही है जो हम से कुछ नहीं मांगती बल्कि हम जो मांगते है वो तो देती ही है... साथ ही बड़े लाड दुलार से़ वो भी दे देती है जो हम नहीं मांग पाते या जिनके बारे में हम नहीं सोच पाते क्योंकि हम इतने जगरुक और शिक्षित नहीं हैं.

आज (23Dec 2019) के दिन संविधान के शहीदों और जख्मियों कि रुहों को बड़ा सुकून मिला होगा जब उन्हें  याद करते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने ये कहा कि ये ये आंदोलन "भारत छोड़ो आन्दोलन" से बड़ा आंदोलन है जबकि अब तक हम यही कहते आ रहे थे कि ये कि ये जे पी आंदोलन से बड़ा आंदोलन है.

‌भारत की बेटियों और सपूतों का खून ज़िंदाबाद है....जो संविधान की राह का आब ए हयात बन गया. ये आंदोलन सफलता के उस शिखर तक जायेगा जिस की अब तक कल्पना भी नहीं की गई  होगी।

अर्थव्यवस्था देखते देखते क्या से क्या हो गई. जनता का सवाल है...
सीने में जलन आंखो में तूफान सा क्यों है...?
इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है...?
...मगर साहब का जवाब सिर्फ "मन की बात" है मगर बात से कहीं पेट भरता है क्या? खाने पीने की चीजें किस हद तक मंहगी हो गई हैं। प्याज़, सब्ज़ी,दूध और अब रेलवे का किराया भी बढ़ने वाला है। रेलवे का किराया तो बहुत पहले बढ़ गया होता मगर झारखंड का इलेक्शन था...लिहाज़ा कुछ दिनों के लिए रोक लिया गया था। 

याद कीजिए! जब साहब नए नए केंद्र में आए थे तो उन्होंने ने बिहार में कहा था कि मैं खुश नसीब हूं...देखिए मेरे प्रधान सेवक बनते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल की कीमत घट गई है।
ख्याल रहे कि डॉक्टर मनमोहन सिंह के वक़्त पेट्रोल 67 डॉलर पर बैरल था मगर मई 2014 के बाद  30 से 36 डॉलर मगर उस वक़्त पेट्रोल की कीमत कम नहीं की गई बल्कि जनता को खूब लूटा गया और जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में पेट्रोल की कीमत बढ़ने लगी और तेल कम्पनियों ने कहा कि उनका घाटा हो रहा है  तो उसी खुश नसीब के चतुर वित्तमंत्री ने कानून बना दिया कि कम्पनियां खुद ही हर दिन कीमत तैं करें यही वजह है कि हर दिन डीज़ल और पेट्रोल की नई कीमत जारी होती है जबकि मनमोहन सिंह ने 67 डॉलर पर बैरल के वक़्त कम्पनियों से कहा कि आप को हम सबसिडी देंगे आप कीमत मत बढ़ाओ मगर प्रधान सेवक ने मलाई खा कर मट्ठा भी आप को दुगने दाम में बेच दिया... ये हैं असली गुजराती। 

राजनीति और बिज़नेस में गुजरात के दो राजनेता और दो ही उद्योगपति सबसे ज़्यादा फायदे में हैं बाकी सब घाटे में हैं....खुद ही जांच परख कर लीजिए इस से भी कहीं ज़्यादा सच्चाई आपको हाथ लगेगी।

साथियों!संविधान बचाने की लड़ाई में आप तन्हा नहीं हो....आप के साथ पूरा देश और देश समेत पूरी दुनिया के स्टूडेंट खड़े हैं।

हम किसी को नागरिकता दिए जाने के खिलाफ नहीं है बल्कि इस बात के खिलाफ हैं कि CAA2019 संविधान की अवधारणा,प्रस्तावना, आर्टिकल 14 और बुनियादी ढांचे के खिलाफ है। नागरिकता देने के लिए धर्म को बुनियाद बनाना संविधान की रूह पर हमला है। केंद्र सरकार से बड़ी अथॉरटी भारत में कोई और है क्या? जब नहीं है तो वो जिसे  नागरिकता देना चाहती है उसे दे मगर धर्म का तड़का न लगाए। बहुत हो चुका हिंदू मुस्लिम....अब और नहीं...हरगिज़ नहीं।

साफ है कि इन्हें हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा चाहिए कयोंकि अब राम मंदिर का रास्ता साफ हो गया है. राम मंदिर का रास्ता साफ होने से इन्हें सब से ज़्यादा नुकसान हो रहा है. इन्हे लगता है कि हिन्दू मसुलिम आपस में दुश्मन हैं जब्कि ये भी जानते हैं कि हम भारत के लोग हैं. हमारी सभ्यता हर दौर के लिए प्रकाश का उत्सव है...
अगर वो खुल्द हमें मुफ्त में ही मिल जाती 

तो ज़िन्दगी में कभी इमतेहा नहीं होता

मदद के वास्ते यारों खुदा को याद करो
खुदा से बढ़ के कोई महरबां नहीं होता_ज़ुल्फ़िक़ार हसन असर

@MobeenJamei

Sunday, December 22, 2019

"मर्ग -ए- अंबोह जश्न दारद"

संविधान की रूह को बचाने के लिए जनता का सड़कों पर उतरना आखिरी मौक़ा है मगर अल्पसंख्यों की भीगती आँखों में मिर्च झोंकने वाले और सब से आखिर में अपनी बे इज़्ज़ती ख़राब करवाने वाले खामोश रहे. वो अभी भी देख रहे हैं...मुंह तक रहे हैं कि बेचारी फुलझड़िया सरकार का कहीं दिल न टूट जाये. जनता का क्या है "अलअवाम कलअनाम" जनता जानवरों की तरह होती है... थोड़ी देर तक रोना धोना करेगी और सीना पीटेगी फिर खामोश हो जाएगी.

धर्म और राजनीति की जाहिल और खोखली लीडरशिप ने निकाह - ए- फ़ुज़ूली में जनता का कन्यादान कर दिया।  इसी लिए इन्हें ये पैगाम देना ज़रूरी है....

एक बस तू ही नहीं मुझ से ख़फ़ा हो बैठा

मैं ने जो संग तराशा था ख़ुदा हो बैठा

मस्लहत छीन ली है क़ुव्वत-ए-गुफ़्तार मगर

कुछ न कहना ही मिरा मेरी ख़ता हो बैठा

शुक्रिया ऐ मेरे क़ातिल ऐ मसीहा मेरे

ज़हर जो तू ने दिया था वो दवा हो बैठा_फ़रहत शहज़ाद 

अपने आप से वादा कीजिये कि अब नहीं सोयेंगे... खैर! अब सोने का मौक़ा भी नहीं मिलेगा...ये कहिये कि पलक भी नहीं झपकेंगे.

जितना मुश्किल किसी आरएसएस-बीजेपी के सपोर्टर को समझनासमझाना है उतना ही किसी दरगाह के मालिक या मदरसे के मुफ़्ती को भी समझनासमझाना है. जब भी इन लोगों से बात कीजिये तो एक बात का एहसास बराबर शिद्दत इख़्तियार कर जाता है कि एक को तो एकेले ही हिंदुस्तान में जीना है और एक को तन्हा ही जन्नत में जाना है. ये दोनों... बात ही नहीं सुनतेझड़क कर और अक्सर बद तमीज़ी पर उतर आते हैं. इन के हिसाब से (अपनी अपनी कम्युनिटी में) जो लोग गुज़र गए वो सब से अच्छे थे और जो लोग पैदा होंगे वो सब से अच्छे होंगे. सारी खामी और खराबी मौजूदा लोगों में है.


उठ्ठो मेरी दुनिया के ग़रीबों को जगा दो

काख़-ए-उमरा के दर ओ दीवार हिला दो

गर्माओ ग़ुलामों का लहू सोज़-ए-यक़ीं से

जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर नहीं रोज़ी

उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो _इक़बाल

साथियों! प्रदर्शन करना अपने आप में पनघट की डगर पर चलना है और जब सरकार की निय्यत ही साफ न हो... गृहमंत्री कुछ कहे, प्रधानमंत्री कुछ कहे, अल्पसंख्यक मंत्री हमेशा अलाप ही लेता रहे धुन कुछ भी हो और जनरल सिक्रेट्री प्रक्रिया का टाईम बताए तो ये और भी  मुश्किल और चैलेंज भरा हो जाता है.

सितम बालाए सितम प्रदर्शनकरियों के कपड़ों की बुनियाद पर शिनाख्त करके उन्हीं के खिलाफ केस दर्ज हो रहा है. इतने लोग मर गए मगर सरकार पीछे हटने को छोड़िये...बात सुनने को तैयार नज़र नहीं आती.

गाँधी जी को पढ़िए...अंदाज़ा होगा कि सिवाए अहिंसा और विरोध के कोई रास्ता नहीं. यही वो चीज़ है कि जिसका अभी तक दुनिया कोई तोड़ नहीं निकाल पायी है. हमें थक हार कर नहीं बैठना है. इस वक़्त हम फासीवादी रेगिस्तान के मुसाफिर हैं और हमारी प्यास भी शदीद है मगर अब हम मंज़िल पर पहुँच कर ही दम लेंगे और अपनी प्यास बुझाएंगे... बहुत सराब (रेगज़ारों में दूर से पानी की तरह चमकती हुई रेत) को देख लिया.... और धोका नहीं खाएंगे फिर उन से भी आखिरी तौबा करेंगे जो हाय तौबा मचा कर बवाल करते हैं.

नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही

नहीं विसाल मयस्सर तो आरज़ू ही सहीफ़ैज़

शहद दिखाए ज़हर पिलाये....फ़िलहाल यही हो रहा है. इसी पैग़ाम के साथ तमाम गुर्गे हम तक पहुंचेंगे. हमें संविधान और देश बचाने के लिए अहिंसात्मक रूप से अपनी लड़ाई लड़नी है.

सूना जंगल रात अंधेरी छाई बदली काली है

सोने वालों जागते रहियो चोरों की रखवाली है

शहद दिखाए ज़हर पिलाए  डाइन क़ातिल शौहर कुश

इस मुरदार पे क्या ललचाया दुनिया देखी भाली है_रज़ा

..."मर्ग-ए- अंबोह जश्न दारद" (संयुक्त मृत्यु जश्न है.)

आज भी बरेली, धारावी जैसे शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. हिम्मत से काम लीजिए. ये पागलपन है....इस से पूरा देश ओत पोत हो उठेगा। 

आज  हमारे दोस्त Sheyam Meera Singh ने अपने फेसबुक पोस्ट में आंकड़े देेते हुए समझााया कि 

क्या कयामत है? आप भी पढ़िए...

1-

30 करोड़ लोग लैंडलेस हैं यानी उनके पास कोई जमीन नहीं है (ये आंकड़ा जेटली जी ने भी सदन में बताया था जब वह मुद्रा योजना लागू कर रहे थे) जब इन लोगों के पास जमीन नहीं है तो किसकी जमीन के डाक्यूमेंट्स दिखाएंगे?

2-

170 लाख लोग होमलेस हैं, यानी उनके पास रहने के लिए घर ही नहीं है. कोई सड़क पर सोता है कोई झुग्गी बनाकर, कोई फ्लाईओवर के नीचे, कोई रैनबसेरा में. ऐसा मैं नहीं कह रहा, केंद्र सरकार की सर्वे करने वाली संस्था NSSO कह रही है. अब मकान ही नहीं है तो क्या सड़क के कागज दिखाएंगे ये लोग, कि कौन सी सड़क के किस फ्लाईओवर के नीचे सोते हैं.

3-
15 करोड़ विमुक्त एवं घुमंतुओं की आबादी है, आपने बंजारे, गाड़िया लोहार, बावरिया, नट, कालबेलिया, भोपा, कलंदर, भोटियाल आदि के नाम सुने ही होंगे. इनके रहने, ठहरने का खुद का ठिकाना नहीं होता, आज इस शहर, कल उस शहर, जब ठिकाना नहीं तो कागज कहां  से होगा. दो एक बकरी और ओढ़ने बिछाने के कपड़े के सिवाय क्या ही होता है इनके पास. अब क्या बकरी का डीएनए चेक करवाकर बताएंगे कि हारमोनियम की तरह ही अब्बा हमारे, बकरी भी छोड़ कर मरे थे.

4-
8 करोड़, 43 लाख इस देश में आदिवासी हैं जिनके बारे में खुद सरकार के पास अपर्याप्त आंकड़ें होते हैं (जनगणना 2011)

5-
आखिर में सबसे महत्वपूर्ण बात.
1970 में देश की साक्षरता दर 34 प्रतिशत भर थी...यानी 66 प्रतिशत लोग अनपढ़ थे... मतलब इस देश के 66 प्रतिशत पुरखों-बुजुर्गों के पास पढ़ाई-लिखाई के कोई कागज नहीं हैं. आज भी करीब 26 प्रतिशत यानी 31 करोड़ लोग अनपढ़ हैं. जब स्कूल ही नहीं गए तो मार्कशीट किस बात की रखी होगी.

अपने अंदर के कट्टरपन को थोड़ा ढीला करिए और अपने गांव-शहर के सबसे कमजोर- पिछड़े लोगों के घरों पर नजर दौड़इए  फिर सोचिए कि उनके पास उनके दादा-परदादा के कौन कौन से डॉक्युमेंट्स होंगे? क्या नागरिकता साबित न कर पाने की हालत में इनके पास इतना धन होगा कि ये हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपना मुकदमा लड़ सकें?

एनआरसी जैसा अनावश्यक, बेफिजूल, और अपमानजनक कानून केवल मुस्लिमों के लिए ही नहीं है. इस बात को जितना जल्दी समझ सकें समझ लीजिए. असम में भी जो हिन्दू शुरुआत में फुदक रहे थे...वही एनआरसी लागू होने के बाद अपने ही देश में "इल्लीगल" हो गए हैं. वो भी शुरुआत में कह रहे थे कि 1 करोड़ घुसपैठिए हैं, जबकि 19 लाख लोग ही थे जो अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाए हैं, उनमें भी 15 लाख तो हिन्दू ही हैं, उसमें केवल 4 लाख ही मुस्लिम, ईसाई, आदिवासी थे। अब वही हिन्दू एनआरसी से परेशान हो चुके हैं और रद्द करने की मांग कर रहे हैं. टैक्स का करोड़ों रुपए का पैसा-धेला लगा सो अलग. असम की 3.12 करोड़ आबादी पर अनुमानित सरकारी खर्च 1200 से 1600 करोड़ है जबकि देश की कुल आबादी 135 करोड़ है सोचिए कितना सरकारी खर्च होगा और आप का अलग से जो होगा वो  तो छोड़ ही दीजिए. और इतना सब कुछ हो जाने के बाद रिजल्ट क्या रहा...गरीब से गरीब आदमी को सब काम छोड़कर वकीलों के चक्कर मारने पड़े, माथे का दर्द झेला, अपमान झेला, और अंत में एक भी आदमी असम से बाहर नहीं गया.

आपके दिमाग में ये सादा सी बात क्यों नहीं बैठती कि सरकार आपके ही टैक्स के पैसे से देश में सर्कस कराने जा रही है जहां बंदरों की तरह आपको ही लाइन में लगकर ये साबित करना होगा कि आप इंडियन हैं...

लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में,
यहां पे सिर्फ मेरा मकान थोड़ी है

*श्याम मीरा सिंह

हे भारतीय जनता! CAA 2019 को अब NRC से जोड़ कर ही देखिये. सरकार खुल कर यही कह रही है. चूँकि उस के पास हर तरह का तंत्र है सो वो गुमराह करने में कमियाब भी हो जाएगी मगर हमेशा याद रखिये कि CAA2019 संविधान की अवधारणाप्रस्तावनाआर्टिकल 14,  15 और बुनयादी ढांचे के खिलाफ है. 

अब सुप्रीम कोर्ट का इम्तेहान है कि वो CAA2019 के सहारे किसी को एहसास दिलाकर उसके साथ सौतेला बर्ताव करने की इजाज़त क्यों और कैसे देता है? हमारे पास है ही क्या! सिवाए संविधान के..! संविधान है तो हम हैं...ये नहीं तो हम भी नहीं.

ये CAA2019 "फूट डालो और राज करो" अधिनियम है. ये संविधान की रूह पर हमला है. बाबा साहेब ने कहा था कि जब तक संविधान मौजूद है समझो मैं तुम्हारे बीच ज़िंदा हूँ. काले अंग्रेज़ों की फाशिस्ट सरकार ने बाबा साहेब के वजूद पर हमला किया है. ये हरगिज़ नाक़ाबिल- ए- बर्दाश्त है...!!!

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है

लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है_फ़ैज़

@MobeenJamei