Thursday, March 26, 2020

Nazm_ Maggi #Corona


"मैगी #कोरोना"

आज हमारे साथी...काहिली में सो गए. सब्ज़ी तो है मगर प्याज़ नहीं है. मैं रोटी बना नहीं सकता और ये भाई साब, चावल खाना नहीं चाहते.


बातचीत के बाद वो मैगी पर तैयार हुए मगर जब मैगी बन गई तो वो इतने नींद में थे कि उन्होंने खाने से मना कर दिया. मैगी भी एक ही पैकेट (₹12 वाली) थी. मेरे लिए तो कुछ अच्छा हो गया मगर ये बात ठीक नहीं कि कोई बिना खाए सो जाए... ख़ैर! मैं ने डिनर समझ कर मैगी खाया. आईआईएमसी (2017-18) में पढ़ते हुए Saturday और Sunday मैगी ही मेरा लंच था क्योंकि मेरे लिए चार मंज़िल उतर कर खाने के लिए जाना बहुत मुश्किल था.

मैगी न होती तो क्या होता, आज दिल में आया कि मैगी की शान में तुकबंदी की जाए. चार लाइन (मिसरे) खट से हो गए बाक़ी को खीचना पड़ा है, लगभग 20 मिनट लगे हैं. तो देवियों और सज्जनों! पेशे खिदमत है... नज़्म "मैगी #Corona" 


मैगी से था लगाव मगर अब तो इश्क़ सा है
लंचो डिनर का चक्कर थोड़ा सा रिस्क सा है


कोरोना का कहर है, जारी जहां में अब तक 
मैगी नहीं है पास तो खाने में फर्क सा है


है वक़्त भी, नहीं भी, हर हाल में ये अच्छा 
इस शान ए काहिली का मसाला भी मुश्क सा है


ये फिक्र ही नहीं कि मैगी है चाइना से 
भारत बना रहा है, दिखने में खुश्क सा है


देखो मोबीन फेंक के जाओगे, अब कहां तुम 
कोरोना की वजह से जीवन भी नर्क सा है.

Plz cooperate Dear!

लंचो डिनर = लंच व डिनर
मुश्क =  ज़बरदस्त खुशबू जो हिरण की ढोढ़ी में होती है.
खुश्क = सूखा
नर्क = नरक, जहन्नम

नोट: आपको कैसा लगा...कमेंट करके बता सकते हैं.

Also read "Tukbandi BHI Gahzall Bhi"https://abirti.blogspot.com/2020/03/blog-post.html?m=1

"میگی #کورونا"

میگی سے تھا لگاؤ مگر اب تو عشق سا ہے
لنچ و ڈنر کا چکر تھوڑا سا رسک سا ہے


کورونا کا قہر ہے، جاری جہاں میں اب تک 
میگی نہیں ہے پاس تو کھانے میں فرق سا ہے


ہے وقت بھی، نہیں بھی، ہر حال میں یہ اچھا 
اس شان کاہلی کا مصالحہ بھی مشک سا ہے


یہ فکر ہی نہیں کہ میگی ہے چائنا سے
بھارت بنا رہا ہے، دکھنے میں خشک سا ہے


دیکھو مبین پھینک کے جاؤگے اب کہاں تم 
کورونا کی وجہ سے جیون بھی نرک سا ہے

Read...संवेदनहीन,Apathy,بے حسی https://abirti.blogspot.com/2020/03/nazm-behisi-apathy.html?m=1

Poetry on Maggi #Corona


Maggi Se Tha Lagao Magar Ab To Ishq Sa Hai 
Lunch-o-Dinner Ka Chakkar Thoda Sa Risk Sa Hai


Corona Ka Qahar Hai, Jari Jahan Me Ab Tak
Maggi Nahi Hai Pas To Khane Me Farq Sa Hai


Hai Waqt Bhi, Nahi Bhi, Har Hal Me Ye Achha
Is Shan-e-Kahili Ka Msala Bhi Mushk Sa Hai


Ye Fikr Hi Nahin Ki Maggi Hai Chaina SE 
Bharat Bana Raha Hai, Dikhne Me Khushk Sa Hai


Dekho Mobeen Phenk Ke Kahoge Ab Kahan Tum
Corona Ki Wajah Se Jeevan Bhi Nark Sa Hai


@MobeenJamei
mobeenahmad.abirti@gmail.com
01: 20 AM
27, March, 2020

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