ताक़त का नंगा नाच
5 जनवरी 2020 की शाम लहू से स्याह हुई। दिल्ली ने कभी इस तरह का हमला नहीं देखा था कि मुंह में राम बगल में छूरी' हो...भविष्य के रौशन दीप को ज़ुल्म और ज़ोर ज़बरदस्ती से बुझाने की कोशिश की गई हो और रक्षक, मूक दर्शक बन गया हो। खून में लतपथ भारत की बेटियों की चीखें बुलंद हो रही हों...और मदद को जो लोग दौड़ पड़े हों और उन्हें रोक कर बेबस कर दिया गया हो... उन पर भी हमला कर दिया गया हो।
इतना भी मत डराओ कि दर ही खत्म हो जाए!
'बईलट' दिल्ली पुलिस ने गुलामी का सबसे बड़ा उदाहरण पेश किया कि जो लोग हमले का शिकार थे उन्हीं के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। आगे भी "लो...या" के खयाल से ही फैसला सुरक्षित रख लिया जाएगा।
डॉक्टर ए पी जे अब्दुल कलाम ने कहा था कि सूरज की तरह चमकने के लिए सूरज की तरह जलना भी होगा। भारत के तमाम संवैधानिक संस्थाओं को सोचना होगा कि डेवलप्ड कंट्री बनने के लिए वहां की संस्थाओं की तरह काम करना होगा। अमेरिका की सनस्थाएं और ट्रंप के बीच टकराव जगज़ाहिर है। मीडिया और ट्रंप की बेनाम जंग से हर कोई वाकिफ है। भारत की संस्थाएं क्लियर करें की उन्हें ज़हनी गुलामी और डर से कब नि निकालना है?
तुम सुनो या न सुनो हाथ बढ़ाओ न बढ़ाओ
डूबते डूबते इक बार पुकारेंगे तुम्हें _इरफ़ान सिद्दीक़ी
बहुत हद तक सोशल मीडिया और कुछ वेबसाइट्स ने जेएनयू अटैक की हकीकत पूरी दुनिया के सामने रख दी है लेकिन सबसे भरोसेमन्द यहां का मीडिया अब अलग अलग नैरेटिव गढ़ रहा है।कल और परसों जेएनयू के वीसी एम जगदीश ने केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय में हायर एजुकेशन के सेक्रेटरी अमित खरे से मुलाक़ात करके अलग ही राम कहानी की शुरुआत कर दी है।
फिलहाल जिस तरह जेएनयू में हो रहा है....आईआईएमसी में रहते हुए मैं ने करीब से देखा है। यही ट्रेंड है। पहले रोका जाता है फिर पैरेलल स्टूडेंट्स खड़े कर दिए जाते हैं। फीस, लाइब्रेरी आदि सुविधाओं की मांग तमाम स्टूडेंट की मांग है बस कोई उलझना नहीं चाहता।" तंग आमद ब जंग आमद" आखिर! सभी विद्यार्थी अपनी अपनी क्लासेज़ छोड़कर आन्दोलन का हिस्सा बन जाते हैं...आन्दोलन कामयाब हो जाता है। फिर आन्दोलन का विरोध करने वाले चाटुकार विद्यार्थी, प्रोफेसर और एडमिनिस्ट्रेशन मुंह छुपाते फिरते हैं। जेएनयू में टेरर अटैक इसीलिए मुंह छुपाकर किया गया। यहां भी यही होगा। जिस तरह हमले से पहले मुंह पर नकाब था उसी तरह जिंदगी भर मुंह छुपाते फिरेंगे।... कुछ हो ना हो दिल तो जरूर काला पड़ जाएगा।
बीसवीं शताब्दी महिलाओं की सदी है। हाल फिलहाल के जो भी आन्दोलन चल रहे हैं उन का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं।
एक साल तक आईआईएमसी में पढ़ाई की, चूंकि यहां लड़कों के लिए हॉस्टल कि सुविधा बंद कर दी गई थी जो आन्दोलन के बाद आइंदा साल बहाल कर दी गई, मैं यकीन से कहता हूं अगर जेएनयू ना होता तो शायद मेरी पढ़ाई की दिशा और दशा कुछ और होती।
जेएनयू के नाम एक तुकबंदी की है क्योंकि कविता या शायरी मेरे बस की बात नहीं। आप भी देखिए अच्छा लगे तो आगे बढ़ाइये।
#JNU
जेएनयू है सख्त जान, जान लो
हारे हो और हारोगे, मान लो
कौन नहीं ये चाहता, किसे नहीं है ये पसंद
आज़ादी के नारों से तुम भी अपनी शान लो
मत खरीदो इंसानों को, ये भी तो तरीक़ा है!
प्यार करो इंसानों से, साथ इन्हें बेदाम लो
कब तक और कितना गढ़ोगे नैरेटिव पे नैरेटिव
ये बेकार की मेहनत छोड़ो, माफी हमसे दान लो
बाबर बाबर करते करते हिंदू-मुस्लिम खूब किया
एक बार तो अपने मुंह से अंग्रेज़ों का नाम लो
असली मुमद्दे असली मांग रोटी कपड़ा और मकान
मन में देश के, हिन्दू मुस्लिम चाहे जितना सान लो
हम तो लड़ेंगे, जीतेंगे भी, देखते रह जाओगे
बद निय्यत हो, हारोगे कुछ भी अब तुम ठान लो
@MobeenAhmad
Good bhaut hi acha h i proud to this speech
ReplyDeleteShukria Janab
DeleteWah۔۔۔ji
ReplyDeleteGood....keep it.
ReplyDeleteHam ladenge aur jeetenge.
💪
DeleteUmda kam h apka
ReplyDeleteShukria Bro....
DeleteGood... Keep it.
ReplyDeleteOk
DeleteThank You
Yes kouch bhi Kar Len....ham let me rahenge
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