ये नज़्म जब संविधान बचाने के लिए सीएए का प्रोटेस्ट कामयाबी से लोकतंत्र को मज़बूत कर रहा था...उसी दौरान लिखी गयी थी. अब जबकि सीएए प्रोटेस्ट में शामिल लोगों को एक एक करके फ़र्ज़ी केस में जेलों में डाला जा रहा है और महिला एक्टिविस्ट सफूरा ज़रगर के खिलाफ UAPA के तहत करवाई हुई है जो कि सरासर क़ानून का ग़लत और मनमाना इस्तेमाल है और लोकतंत्र को खोखला करने की साज़िश भी है...सफूरा के हवाले से निम्नस्तर की घटिया भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है कि शर्म भी शर्मा जाये....तो एक बार फिर आप की खिदमत में पेश है...
दुख़तराने जामिया तुम पर बहुत है इफ़्तिख़ार
सरफ़रोशाने अलीगढ़ जान-ओ-दिल तुम पर निसार
तुमने ज़ालिम को किया है कुल जहां में शर्मसार
अब तुम्हारी सरफ़रोशी हश्र तक है यादगार
तुम हुए सीना-सिपर ज़ुलम-ओ-सितम के सामने
वक़्त के फ़िरऔन के ख़ूनी क़दम के सामने
हक़ पसंदों को क्या महमेज़ है इस काम ने
क़ौम के मर्द-ओ-ज़नां आए हैं तुमको थामने
आएगी इन काविशों से हिंद में फ़स्ले बहार
दुख़तराने जामिया तुम पर बहुत है इफ़्तिख़ार
डॉक्टर अहमद मुज्तबा सिद्दीकी
दुख़तराने जामिया के हौसलों को है सलाम
ज़ालिम-व-सरकश के मुँह पर कस दिया तुमने लगाम
सफ्ह-ए-तारीख़ में ऊंचा तुम्हारा है मक़ाम
फ़ख्र तुम पर क़ौम के हर फ़र्द को होगा मुदाम
पंज-ए-ज़ोर-ओ-सितम को कर दिया है ख़ाकसार
दुख़तराने जामिया तुम पर बहुत है इफ़्तिख़ार
तख़्त से फ़िरऔन का भी हमने देखा है सितम
और हिटलर ने बनाया था जो दस्तूर-ए-अलम
हिंद पर अंग्रेज़ का वो ज़ुल्म वाला हर क़दम
फिर तबाही नामुरादी से खुला सब का भरम
कब्ज़-ए-ज़ुलम-ओ-जफ़ा आख़िर कहाँ है पाएदार
दुख़तराने जामिया तुम पर बहुत है इफ़्तिख़ार
जो बुलंदी पर गया है आएगा उस को ज़वाल
सलतनत हरदम रहेगी है कहाँ उस की मजाल
हर किसी इन्सान को लाज़िम है करना इंतिक़ाल
बरतरी पर बस रहेगी ज़ात है जो ज़ुल-जलाल
सुन ले ज़ालिम अब तेरा ये ख़त्म होगा इक़तिदार
दुख़तराने जामिया तुम पर बहुत है इफ़्तिख़ार
#Nazm "हम बोलेंगे" https://abirti.blogspot.com/2020/01/jmiamujnu-indiaagainstcaanrcnrp.html?m=1
अफ़रोज़ आलम चिरैयाकोटी Sir
जल रहा है मुल्क देखो चार-सू है इज़तिराब
बे-गुनाहों पर ही तेरा चल रहा है क्यों इताब
अब उन्ही बेचैनियों से जन्म लेगा इन्क़िलाब
ज़ुलम की सब साज़िशें हो कर रहेंगी बे-नक़ाब
फिर तेरा हर इफ़्तिरा-ओ-झूट होगा आशकार
दुख़तराने जामिया तुम पर बहुत है इफ़्तिख़ार
ज़ुलम का तेरा भी आख़िर आएगा अब इख़तिताम
तू ने देखा ही नहीं आहों का अब तक इंतिक़ाम
आज सड़कों पर जो तू ने कर दिया है इज़दिहाम
अब यहीं से आएगा तेरी तबाही का पयाम
फिर तेरा रह जाएगा बर्बाद क़ौमों में शुमार
दुख़तराने जामिया तुम पर बहुत है इफ़्तिख़ार
तुमको क्यों तालीम-गाहों से हुई है दुश्मनी
है सितमगरों से तेरी किस लिए ये दोस्ती
तालिब-ए-इलमों की तुमने छीन ली है सादगी
दहर में होगी नहीं फिर अब ये तेरी धांदली
शान-ओ-शौकत अब तेरी होगी जहां में तार-तार
दुख़तराने जामिया तुम पर बहुत है इफ़्तिख़ार
अब तो लाज़िम है कि सारे हमवतन बोला करें
तेरे हर इक झूट को दुनिया में हम इफ़शा करें
तेरी ख़ूनी साज़िशें नाकाम हर लम्हा करें
दूर अपने मुल्क से हम ज़ुल्म का क़बज़ा करें
और अमन-ओ-आश्ती इस में करें हम उस्तवार
दुख़तराने जामिया तुम पर बहुत है इफ़्तिख़ार
क्यों डराते हो...! https://abirti.blogspot.com/2019/12/blog-post_19.html?m=1
अब इरादा है यही दिलशाद हम रुकते नहीं
सरफ़रोशी का है जज़बा हम कभी झुकते नहीं
पंज-ए-ज़ालिम के आगे सर कभी रखते नहीं
हम वतन के वास्ते मरने से भी डरते नहीं
अब हमारी फ़तह तक काविश रहेगी बरक़रार
दुख़तराने जामिया तुम पर बहुत है इफ़्तिख़ार
नोट: अगर किसी शब्द का अर्थ जानना जो तो कमेंट करें, जवाब में बता दिया जायेगा.
ताक़त का नंगा नाच #JNU #Nazm... https://abirti.blogspot.com/2020/01/jnu.html?m=1
दुख़तराने जामिया: जामिया की छात्राएं
इफ़्तिख़ार: गौरव, फ़ख्र
सरफ़रोशाने अलीगढ़: अलीगढ़ के जयाले, बाहदुर छात्र
सीना-सिपर: डट जाना
फ़िरऔन: क्रूर शासक
महमेज़: बढ़ावा देना
मर्द-ओ-ज़नां: मर्द औरत
काविशों: कोशिशों
फ़स्ले बहार: बहार की फ़सल
दुख़तराने जामिआ तुम
सरकश: नाफरमान, झूटा वादा करने वाला
सफ्ह-ए-तारीख़: इतिहास का पन्ना
मुदाम: हमेशा
पंज-ए-ज़ोर-व-सितम: ज़ुल्म का पंजा
ख़ाकसार: खाक में मिला हुआ
दस्तूर-ए-अलम: ज़ुल्म का क़ानून
पाएदार: मज़बूत, टिकाऊ
ज़वाल: डूबना, ख़त्म होना
मजाल: हिम्मत
ज़ुल-जलाल: अल्लाह, रब
इक़तिदार: हकूमत, सरकार
इज़तिराब: बेचैनी
इताब: सज़ा, सताना
इफ़्तिरा: झूट गढ़ना
आशकार: ज़ाहिर होना
इख़तिताम: खत्म होना
इंतिक़ाम: बदला लेना
इज़दिहाम: भीड़ लगना
पयाम: पैग़ाम, सन्देश
तालीम-गाहों: जहाँ शिक्षा दी जाये
सितमगरों: सितम ढाने वाले
तालिब-ए-इलमों: छात्र-छात्रा
दहर: ज़माना
इफ़शा: ज़ाहिर करना
उस्तवार: क़ायम करना
दिलशाद: दिल खुश करने वाला, दिलखुश
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रचनाकार: दिलशाद मिस्बाही छात्र #AMU
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यूं बे-हिसी के दाग़ मिटाता चला गया
आता रहा जो दिल में सुनाता चला गया
दर WhatsApp #Nazm... https://abirti.blogspot.com/2020/05/hindi-poetry-on-whatsapp-covid19pandemic.html
@MobeenJamei
Nazm #Modi #budget2020 #CAAProtest http://abirti.blogspot.com/2020/02/nazm-modi-budget2020-caaprotest.html?m=1



Lajawab
ReplyDeleteWell
ReplyDeleteماشاءاللہ بہت خوب
ReplyDeleteMasha allah bahut khub bhai
ReplyDeleteMotivational Mazm
ReplyDeleteBahut umda
Masha Allah
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