पढ़िए! कविता के रूप में भारतीय संविधान की प्रस्तावना
रचनाकार /कवि : ग़ुलाम गौस
हम भारतीय हैं, हम भारतीय
करते हैं यह अज़्म शहरी तमाम
बनाएंगे भारत में ऐसा निज़ाम
जो हो आला, समाजी, और हाकिम अवाम
न हो जो किसी एक मज़हब के नाम
क्योंकि हम भारतीय हैं, हम भारतीय
जहां इंसाफ हर दम सभी को मिले
समाजी, मआशी, सियासी मिले
तरक्की का हाथों में मश-अल लिए
दिल से गाए, झूमे और यह कहे
कि हम भारतीय हैं, हम भारतीय
दीन -ओ- इबादत में आज़ाद हों
ख्यालों के इज़हार में शाद हों
यक्सां मावाक़े से आबाद हों
हैसियत में सभी लोग हम्ज़ाद हों
क्योंकि हम भारतीय हैं हम भारतीय
उखुव्वत का दीपक जलाएंगे हम
अज़मत ए फर्द को भी बढ़ाएंगे हम
कौमी वहदत का जाम पिलाएंगे हम
सालमियत यकीनी बनाएंगे हम
क्योंकि हम भारतीय हैं हम भारतीय
छब्बीस नवंबर उन्चास को
आईन - ए- हिंद की सभी बात को
आज करते हैं नाफिज़ जो भी कहो
सारी दुनिया को तुम यह बतला ही दो
कि हम भारतीय हैं हम भारतीय
*कवि जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं।
अज़्म = having solemnly resolved
मआशी = अर्थव्यवस्था
दीन = मज़हब
यक्सां मावाक़े = Equal opportunities
हम्ज़ाद = बराबर, साथ सााथ
उखुव्वत = भाईचारा
अज़मत ए फर्द = नागरिक का शान
कौमी वहदत = राष्ट्रीय एकता
सालमियत = सिक्योरिटी, अटूट, अभिन्न
आईन = संविधान
नाफिज़ = लागू किया जाना
بہت اچھے
ReplyDeleteماشاللہ
💝
DeleteI proud
ReplyDeleteWoW....💗
ReplyDeleteI proud
ReplyDeleteWah
ReplyDeleteExcellent and full of motivation ,keep it on ,Dost
ReplyDeleteThank you
DeleteMasha allah bahut khoob
ReplyDeleteThank you
ReplyDeleteWah nice poem
ReplyDeleteProud to be indian